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पंडित विवाद पर सीएम नाराज, बोर्ड करेगा प्रश्न विवाद की जांच?

By राजेंद्र कुमार | Updated: March 16, 2026 17:55 IST

दारोगा भर्ती परीक्षा का पेपर बनाने वाली कंपनी होगी ब्लैक लिस्ट. दस लाख से अधिक अभ्यर्थी एसआई भर्ती परीक्षा में हुए थे शामिल.

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ठळक मुद्देसोशल मीडिया पर ब्राह्मण वर्ग का विरोध तेज होता जा रहा है.पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मामले की जांच करने का फैसला किया है. पेपर सेट करने वाली कंपनी ब्लैक लिस्ट भी की जा सकती है.

लखनऊः उत्तर प्रदेश की सब इंस्पेक्टर (दारोगा) की भर्ती परीक्षा में अवसरवादी शब्द के विकल्प में पंडित दिए जाने पर मचा बवाल थम नहीं रहा है. सूबे के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नाराजगी जताई है. मुख्यमंत्री ने इसे लेकर निर्देश दिया है कि किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ और सम्प्रदाय की मर्यादा एवं आस्था के विषय में अमर्यादित टिप्पणी ना की जाए और सभी पेपर सेंटर्स को भी इस संबंध में निर्देशित किया जाए. सीएम योगी की इस निर्देश के बाद भी सोशल मीडिया पर ब्राह्मण वर्ग का विरोध तेज होता जा रहा है.

जिसका संज्ञान लेते हुए पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मामले की जांच करने का फैसला किया है. इस जांच में जो जिम्मेदार सामने आएंगे उन पर कार्रवाई होगी, जिसके चलते पेपर सेट करने वाली कंपनी ब्लैक लिस्ट भी की जा सकती है. उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जा सकता है. सरकार को उम्मीद है कि जांच के बाद जो कार्रवाई की जाएगी, उससे यह मामला शांत हो जाएगा.

ऐसे शुरू हुआ विरोध

इस विवाद की शुरुआत गत शनिवार को सब इंस्पेक्टर की भर्ती परीक्षा में सामान्य हिंदी के सेक्शन में पूछे गए एक प्रश्न से हुई. इस प्रश्न में पूछा गया था कि अवसर पर बदल जाने वाले के लिए एक शब्द लिखिए. विकल्पों में पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी दिए गए थे.परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

जिसमें पंडित शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने का विरोध शुरू हुआ. और भाजपा सचिव अभिजात मिश्रा ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. सूबे के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए शनिवार को यह दावा किया, इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के इस कथन के बाद भी लोगों की नाराजगी दूर नहीं हुई तो रविवार को इस मामले में सीएम योगी ने हस्तक्षेप किया लेकिन लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई. ऐसे में सोमवार को पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मामले की जांच करने के आदेश दिए. बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न पत्र स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं किए जाते, बल्कि अत्यंत गोपनीय संस्थानों के माध्यम से तैयार कराए जाते हैं, ताकि परीक्षा से पहले उनकी सुरक्षा बनी रहे. गोपनीयता बनाए रखने के लिए बोर्ड के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र देखने की अनुमति नहीं होती.

अब यह जांच की जाएगी कि प्रश्न पत्र किस कंपनी ने सेट किया? प्रश्न में उस विकल्प को क्यों और किसने दिया? इसके पीछे कोई साजिश रही है या लापरवाही? ऐसे तमाम सवालों के जवाब जांच अधिकारी तलाश करेंगे. जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी, प्रकरण में एफआईआर भी दर्ज हो सकती है.

एक सप्ताह में पूरी होगी जांच, दोषी पर होगी त्वरित कार्रवाई

बताया जा रहा है कि एक सप्ताह की भीतर ही यह जांच पूरी हो जाएगी. फिर जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषी पाए गए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार इस मामले में अब और देर नहीं करना चाहती, क्योंकि एसआई के 4,543 पदों की भर्ती के लिए हुई एसआई भर्ती परीक्षा में  10.77 लाख अभ्यर्थी हुए शामिल हुए थे. पन्द्रह लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था.

जाहिर है कि जिसे परीक्षा से इतनी बड़ी संख्या में युवा जुड़े हैं, उस परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर प्रदेश भर में मचे विवाद से सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है. सत्ता पक्ष से जुड़े तमाम विधायक और मंत्री भी इस विवाद से खफा हैं, सभी का कहना है कि  सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में अवसरवादी शब्द के विकल्प में पंडित लिखना उचित नहीं है.

इससे पंडितों का पीड़ा हुई है, उन्हे लगता है कि जानबूझ कर अपमान किया जा रहा है. इस कारण से ही प्रदेश सरकार इस मामले को शांत करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने की तैयारी में है. फिलहाल सरकार ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन यह घटना इस बात का संकेत भी है आगामी विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ते हुए राज्य की जातीय और राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से अधिक तीखी हो सकती हैं.  

टॅग्स :उत्तर प्रदेशयोगी आदित्यनाथलखनऊ
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