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यूक्रेन संकट: पश्चिमी राजनयिकों के संयुक्त पत्र पर इमरान खान के तेवर सख्त, पूछा- क्या आपने भारत को ऐसा पत्र लिखा था?

By विशाल कुमार | Updated: March 7, 2022 08:12 IST

यूरोपीय संघ के सदस्य देशों सहित 22 राजनयिक मिशनों के प्रमुखों ने 1 मार्च को एक संयुक्त पत्र जारी कर पाकिस्तान से यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया था।

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ठळक मुद्दे22 राजनयिक मिशनों ने पाकिस्तान से यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की निंदा करने की मांग की थी।खान ने कहा कि आप हमारे बारे में क्या सोचते हैं? क्या हम तुम्हारे गुलाम हैं।खान ने पूछा कि क्या आपने भारत को ऐसा पत्र लिखा था?

इस्लामाबाद: पाकिस्तान स्थित पश्चिमी देशों के राजनयिकों की रूस की निंदा करने की मांग वाली संयुक्त अपील पर तीखी टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को पूछा कि क्या वे पाकिस्तान को अपना गुलाम समझते हैं?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों सहित 22 राजनयिक मिशनों के प्रमुखों ने 1 मार्च को एक संयुक्त पत्र जारी कर पाकिस्तान से यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया था।

हालांकि, विभिन्न देशों के राजनयिकों द्वारा ऐसी अपील करने वाला पत्र लिखना दुर्लभ था।

वहीं, खान ने एक राजनीतिक रैली में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप हमारे बारे में क्या सोचते हैं? क्या हम तुम्हारे गुलाम हैं...कि जो कुछ तुम कहोगे, हम करेंगे?

उन्होंने आगे कहा कि मैं यूरोपीय संघ के राजदूतों से पूछना चाहता हूं: क्या आपने भारत को ऐसा पत्र लिखा था? इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान को नुकसान हुआ क्योंकि उसने अफगानिस्तान में पश्चिमी नाटो गठबंधन का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस, चीन और यूरोप के साथ हमारी दोस्ती है। हम किसी कैंप में नहीं हैं। चूंकि हम तटस्थ हैं, हम यूक्रेन में इस युद्ध को समाप्त करने के प्रयास में इन देशों के साथ सहयोग करने का प्रयास करेंगे।

बता दें कि, भारत, चीन और यूएई की तरह ही पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा करने वाले प्रस्ताव से अनुपस्थित रहा था जबकि वह पश्चिमी देशों का पारंपरिक सहयोगी माना जाता है।

वहीं, यूक्रेन पर रूस के हमले के ठीक पहले खान रूस पहुंच गए थे और पुतिन से मुलाकात की थी।

शुक्रवार को, एक पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि दूतों द्वारा अपने पत्र सार्वजनिक करना सामान्य राजनयिक अभ्यास नहीं था और हमने इसे साफ कर दिया है।

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