उज्जैन: बडनगर तहसील के ग्राम बंगरेड निवासी राजावत परिवार ने आधुनिक समाज में क्रांति की नई इबारत लिखी है। शिक्षाविद् एवं स्कूल संचालक क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष और लोटस ग्रुप के चेयरमैन जितेंद्रसिंह राजावत ने अपने परिवार ने समाज में परिवर्तन का सूत्रपात किया है। उन्होंने पुत्र के विवाह समारोह में सामाजिक बंधुओं की उपस्थिति में वधु पक्ष की और से दी गई 25 लाख नकदी एवं 15 तोला सोना की भेंट को सप्रेम लौटा कर नया संदेश दिया।
लोटस रिसॉर्ट में आयोजितराजावत के सुपुत्र आदर्शदीप सिंह के तिलक दस्तूर के दौरान, वधु पक्ष (तामलपुर) की ओर से सम्मान स्वरूप यह नकदी एवं सोना भेंट किया गया था। उपस्थित जनसमूह उस समय अचंभित और गदगद हो गया, जब राजावत और उनके परिवार ने इस भारी भरकम राशि और आभूषणों को लेने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया।
उन्होंने केवल एक अंगूठी को शगुन के रूप में स्वीकार किया और शेष राशि व जेवरात यह कहते हुए लौटा दिए कि "रिश्ता अटूट प्रेम और संस्कारों से बनता है, धन से नहीं।" बकौल जितेन्द्र सिंह राजावत "समाज में जिलाध्यक्ष होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि मैं वह मार्ग दिखाऊं जिससे मध्यम और गरीब परिवारों को अपनी बेटियों की शादी में आर्थिक बोझ महसूस न हो। हम चाहते हैं कि समाज दिखावे से दूर होकर रिश्तों की गरिमा को समझे।"
राजावत क्रांतिकारी विचारों के साथ समाज सेवा में अग्रणी हैं। 2015 से पर्यावरण क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने हजारों पौधों का रोपण किया साथ ही सैकड़ों असहाय बच्चों को शिक्षा व बेटियों को गोद लेकर उनकी शिक्षा से लेकर विवाह तक का प्रेरणादायक कार्य किया है। राजावत ने एक दर्जन मुक्तिधामों पर भी सौंदर्यीकरण का अनूठा कार्य किया है।
ये है पूरा मामला
26 अप्रैल रविवार को ग्राम बंगरेड के प्रतिष्ठित राजावत परिवार में आयोजित ठा. कमलसिंह राजावत के सुपौत्र एवं लोटस ग्रुप के चेयरमेन जितेंद्रसिंह राजावत के पुत्र आदर्शदीप सिंह के तिलक अवसर पर वधु पक्ष (तामलपुर) द्वारा 25 लाख रुपए की राशि नगद एवं 15 तोला सोना भेंट स्वरूप प्रदान किया गया।
राजावत परिवार ने अत्यंत सराहनीय निर्णय लेते हुए एक अंगूठी को प्रतीकात्मक रूप में स्वीकार कर शेष संपूर्ण नगद राशि एवं स्वर्ण आभूषणों को पूरे सम्मान के समक्ष वधु पक्ष को दूल्हे के पिता जितेंद्रसिंह राजावत ने यह कहते हुए लौटा दिया कि विवाह कोई आर्थिक सौदा नहीं है और उन्हें बहू के रूप में लक्ष्मी स्वरूप बेटी चाहिए, न कि दहेज का धन।
क्षेत्र में दहेज प्रथा के खिलाफ चल रही जागरूकता मुहिम के बीच बंगरेड का यह विवाह अब दहेज मुक्त शादी का प्रतीक बन गया है। क्षेत्र में सोशल मीडिया पर भी यह तिलक सराहा जा रहा है।