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त्रिपुरा सरकार सुनिश्चित करे, स्थानीय निकाय चुनाव प्रचार से किसी दल को न रोका जाए: न्यायालय

By भाषा | Updated: November 11, 2021 21:03 IST

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नयी दिल्ली, 11 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को त्रिपुरा सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि स्थानीय निकाय चुनावों में हिस्सा ले रही तृणमूल कांग्रेस सहित किसी भी राजनीतिक दल को कानून के अनुसार उसके चुनावी अधिकारों का इस्तेमाल करने तथा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से प्रचार करने से न रोका जाए।

शीर्ष अदालत ने साथ ही राज्य सरकार को नगर निगम चुनावों में राजनीतिक भागीदारी के अबाध अधिकार के लिए कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के वास्ते उचित व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और उसकी राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। इस याचिका में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ व्यापक स्तर पर हिंसा का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों को सुरक्षा मुहैया कराने का अनुरोध किया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘चूंकि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है, इसलिए यह सुनिश्चित करना प्रतिवादी (त्रिपुरा सरकार) का बाध्यकारी दायित्व है कि चुनाव मैदान में उतरे किसी भी राजनीतिक दल को कानून के अनुसार उसके चुनावी अधिकारों का इस्तेमाल करने तथा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से प्रचार करने से रोका न जाए।’’

उसने कहा कि इसे लागू करने और इसका अनुपालन करने के लिए राज्य की कानून प्रवर्तन मशीनरी के साथ-साथ त्रिपुरा सरकार के गृह विभाग के सचिव एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा आवश्यक व्यवस्था की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।

पीठ ने कहा, ‘‘हम तदनुसार प्रतिवादियों को एक अंतरिम आदेश के माध्यम से, इन मुकदमों में न्यायालय के समक्ष रखी गई शिकायत पर विधिवत विचार करने का निर्देश देते हैं, जिसे इस आदेश के पहले भाग में संक्षेप में ध्यान दिलाया गया है। यह इसलिए ताकि इस तरह से कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय किये जा सकें, जिससे आगामी नगर निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक भागीदारी के अबाधित अधिकार को आगे बढ़ाया जाए।’’

पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत सुरक्षा की अर्जी के संबंध में, यााचिका में पक्षकार बनाये गये संबंधित पुलिस अधीक्षक प्रत्येक मामले और क्षेत्र के संदर्भ में खतरे की अवधारणा के संबंध में निर्णय लेंगे और सुरक्षा की आवश्यकता के रूप में आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

पीठ ने कहा, ‘‘प्रथम प्रतिवादी (त्रिपुरा सरकार) द्वारा एक हलफनामा दायर किया जाएगा, जिसमें वर्तमान आदेश के अनुसरण में उठाए जा रहे कदम उल्लेखित किये जाएंगे। साथ ही त्रिपुरा में आगामी नगर निकाय चुनावों के दौरान चुनाव की प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रहे इसके लिए किये गये उपायों की जानकारी दी जाएगी।’’

पीठ ने पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह सचिव को अदालत के निर्देशों के अनुसरण में हलफनामे पर एक संयुक्त रिपोर्ट दाखिल करने के लिए भी कहा।

पीठ ने मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तारीख तय की।

टीएमसी और देव ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को उन क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है जहां नवंबर 2021 में चुनाव होने हैं।

स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया 22 अक्टूबर को अधिसूचना के बाद शुरू हुई और 25 नवंबर को मतदान होगा। राज्य में एक नगर निगम, तेरह नगर परिषदों और छह नगर पंचायतों के लिए मतदान 25 नवंबर को होगा।

तृणमूल कांग्रेस और देव ने चुनाव प्रचार के दौरान गत दो अगस्त से अब तक अपने प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई हिंसा की कई घटनाओं को अपनी याचिका के सारांश में सूचीबद्ध किया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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