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तृणमूल कांग्रेस सांसद ने हाल में संपन्न संसद सत्र को लेकर मोदी, केंद्रीय मंत्रियों से सवाल पूछे

By भाषा | Updated: August 20, 2021 18:31 IST

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर नये सिरे से निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने हाल में संपन्न हुए संसद सत्र को लेकर शुक्रवार को कई सवाल उठाये और पूछा कि संसद में अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति की क्या वजह रही। ओ’ब्रायन ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों से विभिन्न विषयों पर नौ प्रश्न किये हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष को पेगासस जासूसी मामले और विवादास्पद कृषि कानूनों पर दोनों सदनों में चर्चा नहीं करने दी गयी। राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता ने यह भी पूछा कि संसद के मॉनसून सत्र को तय समय से पहले स्थगित क्यों कर दिया गया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर डाले वीडियो में पूछा है, ‘‘आपने (प्रधानमंत्री ने) विपक्ष के किसी सवाल का जवाब देना जरूरी क्यों नहीं समझा? संसद में ओबीसी से जुड़े विधेयक पर प्रधानमंत्री उपस्थित क्यों नहीं रहे? पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा जी, मनमोहन सिंह जी उपस्थित थे। मोदीजी कहां थे?’’ राज्यसभा सदस्य ने कहा कि दोनों सदनों में 38 विधेयक औसतन 10-10 मिनट की चर्चा के साथ पारित कर दिये गये। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले पांच साल में राज्यसभा में किसी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है। ओब्रायन ने यह भी जानना चाहा कि लोकसभा उपाध्यक्ष चुनने में देरी की क्या वजह है जो पद पिछले दो साल से अधिक समय से खाली पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद ने अपने आखिरी प्रश्न में कैबिनेट मंत्रियों से पूछा है, ‘‘संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना किसका काम है। क्या यह सरकार की जिम्मेदारी है या विपक्ष की? सरकार किसके प्रति जवाबदेह है? जनता के प्रति। हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं।’’ ओब्रायन और उनकी पार्टी पर पलटवार करते हुए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही अवरुद्ध करने के बाद अब ‘नौटंकी’ कर रही है।उन्होंने कहा, ‘‘संसद में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के व्यवहार से बंगाल की छवि खराब हुई है। उनकी एकमात्र मंशा कार्यवाही को बाधित करने और राजनीतिक फायदा उठाने की थी। विपक्ष के नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव के कारण महामारी पर महत्वपूर्ण चर्चा सही से नहीं हो सकी। ओब्रायन और अन्य नेताओं को पहले अपने आचरण के बारे में बात रखनी चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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