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शिवसेना ने भाजपा के हिंदुत्व मॉडल को खोखला बताते हुए कहा, "गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के सामने 'हनुमान चालीसा' बजाकर पीछे हटा दें"

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 12, 2022 14:03 IST

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक लेख में आरोप लगया है कि भाजपा का मौजूदा "नव-हिंदुत्ववाद" देश को 1947 से पहले यानी आजादी के ठीक पहले सांप्रदायिक माहौल की ओर ढकेल रहा है।

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ठळक मुद्देशिवसेना ने 'सामना' के संपादकीय में कहा कि भाजपा का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है भाजपा के पास हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करने के अलावा और कोई एजेंडा नहीं हैपार्टी का कहना है कि भाजपा का हिंदुत्व स्वार्थी, संकीर्ण और खोखला है

मुंबई:महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच वर्चस्व की लड़ाई अपने चरम पर पहुंची हुई दिखाई दे रही है। भाजपा की पूर्व सहयोगी रही शिवसेना ने मंगलवार को जमकर निशाना साधा और इस बात का दावा किया कि भाजपा का हिंदुत्व संकीर्ण, स्वार्थी और खोखला है। 

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक लेख में आरोप लगया है कि भाजपा का मौजूदा "नव-हिंदुत्ववाद" देश को 1947 से पहले यानी आजादी के ठीक पहले सांप्रदायिक माहौल की ओर ढकेल रहा है।

'सामना' के संपादकीय में शिवसेना ने इस बात का भी दावा किया है कि भाजपा का हिंदुत्व से कोई लेना-देना नहीं है और उसके पास केवल हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दरार पैदा करने के अलावा और कोई एजेंडा नहीं है।

हाल के दिनों में हनुमान चालीसा पर हो रही राजनीति को अपने कॉलम में शामिल करते हुए शिवसेना ने लिखा है कि अगर गलवान घाटी में चीनी सैनिक 'हनुमान चालीसा' बजाने से पीछे हटने को तैयार हैं तो वहां भी उसका पाठ होना चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार की अगुवाई करने वाली पार्टी शिवसेना ने अपने लेख में वर्तमान हालात पर व्यंग्य करते हुए लिखा है कि क्या मस्जिदों के बाहर 'हनुमान चालीसा' बजाने से कश्मीरी पंडितों की समस्याओं के समाधान हो जाएगा, क्या इससे बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो जाएगा?

पार्टी का कहना है, “यह स्पष्ट है कि भाजपा का हिंदुत्व स्वार्थी, संकीर्ण और खोखला है। यह इस शक को मजबूती प्रदान करता है कि ये चुनाव जीतने के लिए दंगों को अंजाम देने और धर्मों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं।”

बुरका विवाद और कुछ हिंदुत्ववादी संगठनों के द्वारा कर्नाटक में मुसलमानों को मंदिरों के बाहर दुकाने न लगाने की बात का हवाला देते हुए शिवसेना ने कहा, "भाजपा का 'नव-हिंदुत्ववाद' साल 1947 में विभाजन पूर्व सांप्रदायिक माहौल जैसा है।"

बीते रविवार को रामनवमी पर जवाहर लाल नेहरू के कावेरी छात्रावास के मेस में मांसाहारी भोजन परोसने को लेकर दो छात्र संगठनों के बीच हुई हिंसक झड़प का जिक्र करते हुए शिवसेना के संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा इस तरह के मुद्दों के जरिये देश का ध्यान मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।

शिवसेना का स्पष्ट कहना है, "धर्म एक अफीम है और भारत में हर रोज होने वाली सांप्रदायिक घटनाओं से इस बात की पुष्टि भी होती है। जेएनयू में हिंसा मांसाहारी भोजन के कारण हुई, लेकिन भाजपा इसमें भी भगवान राम के नाम को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

टॅग्स :शिव सेनाBJPमहाराष्ट्रमुंबई
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