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तमिलनाडु: सुप्रीम कोर्ट ने अति पिछड़े समुदाय वन्नियार को दिया गया 10.5 फीसदी आरक्षण रद्द किया, हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

By विशाल कुमार | Updated: March 31, 2022 12:59 IST

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसने आरक्षण को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि केवल जाति ही आरक्षित श्रेणी में कोटा देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।वन्नियार को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10.5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।कोर्ट ने कहा कि केवल जाति ही आरक्षित श्रेणी में कोटा देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है।

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट नेतमिलनाडु में अति पिछड़े समुदाय (एमबीसी) वन्नियार को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में दिए गए 10.5 प्रतिशत आरक्षण को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया।

जस्टिस एल. नागेश्वर राव औरजस्टिस बीआर गवई की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसने आरक्षण को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि केवल जाति ही आरक्षित श्रेणी में कोटा देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘हमारी राय है कि वन्नियाकुल क्षत्रियों के साथ एमबीसी समूहों के बाकी के 115 समुदायों से अलग व्यवहार करने के लिए उन्हें एक समूह में वर्गीकृत करने का कोई ठोस आधार नहीं है और इसलिए 2021 का अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। अत: हम उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हैं।’’

गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा ने पिछले साल फरवरी में वन्नियार समुदाय को 10.5 फीसदी आरक्षण देने के तत्कालीन सत्तारूढ़ एआईएडीएमके द्वारा पेश किए विधेयक को पारित कर दिया था।

मौजूदा डीएमके सरकार ने इसके क्रियान्वयन के लिए जुलाई 2021 में एक आदेश पारित किया। उसने एमबीसी को दिए कुल 20 प्रतिशत आरक्षण को विभाजित कर दिया था और जातियों को फिर से समूहों में बांटकर तीन अलग श्रेणियों में विभाजित किया तथा वन्नियार को 10 प्रतिशत उप-आरक्षण मुहैया कराया था। वन्नियार को पहले वन्नियाकुल क्षत्रिय के नाम से जाना जाता था।

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