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सूरत की आग एक सीखः UHRF ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जताई चिंता, सुझाए समाधान के रास्ते

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 26, 2019 12:05 IST

सूरत कोचिंग अग्निकांडः प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यूएचआरएफ ने आग से बचाव को उनके सुशासन प्राथमिकता में शामिल करने की मांग की

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ठळक मुद्देयूएचआरएफ आग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार से लंबे समय से देशव्यापी कानून बनाने की मांग कर रही है। यूएचआरएफ आग से बचाव के लिए कार्य करने वाली देश की चुनिंदा संस्थाओं में से एक है

आग से होने वाले दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और इसकी वजह से असमय मौत का ग्रास बनने वाले लोगों के आंकड़ों को एक आंख खोलने वाली सच्चाई के तौर पर स्वीकार करते हुए इससे निपटने के लिए युनाइटेड हयूमन राइट फैडरेशन, यूएचआरएफ, ने सरकार से सख्त और तीव्र कदम उठाने की मांग की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में यूएचआरएफ ने कहा है कि वह अपने सुशासन के एजेंडा में आग से सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता वाले बिंदु में शामिल करें। यूएचआरएफ आग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार से लंबे समय से देश—व्यापी कानून बनाने की मांग कर रही है। यूएचआरएफ आग से बचाव के लिए कार्य करने वाली देश की चुनिंदा संस्थाओं में से एक है और उसका मानना है कि इसके लिए सरकार और न्यायपालिका को अपने स्तर पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है। 

यूएचआरएफ के अध्यक्ष संतोष बागला ने कहा कि फरवरी में करोल बाग दिल्ली के एक होटल में आग की एक दुर्घटना में 17 लोगों की असमय मौत हो गई थी। अब सूरत में 20 मासूम छात्रों की आग की वजह से दर्दनाक असमय मौत हो गई है। आखिर हम कितनी और ऐसी दुर्घटनाओं का इंतजार करते रहेंगे जिससे कि किसी सख्त कानून बनाने को लेकर कदम उठाया जा सके। हमनें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त देश व्यापी कानून बनाने की मांग की है। हमनें चुनाव से पहले भी भाजपा से मांग की थी कि वह अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी आग से बचाव के लिए सख्त कानून बनाने का वादा करे। 

यूएचआरएफ के सचिव अरूण पाल सिंह कहते हैं कि यह दुखद है कि इस बाबत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी किसी राजनैतिक दल ने आग से बचाव के लिए सख्त कानून बनाने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। भारत की तरक्की की कहानी बिना आग की दुर्घटनाओं से बचाव के पूरी नहीं हो सकती है। इसके लिए एक केंद्रीय कानून की जरूरत है। जिससे आग से बचाव के साथ ही ऐसी दुर्घटनाओं में लोगों के असमय मौत को रोका जा सके। हम सरकार से मांग करते रहे हैं कि वह ऐसा देशव्यापी कानून पारित करे जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पर लागू हो। 

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यूएचआरएफ  ने कहा है कि यह वक्त की मांग है कि हम इस मांग पर समुचित कदम उठाएं। इस पर तत्काल प्रभाव से कानून बनाने की जरूरत है। आग से बचाव के नियमों की अवेहलना ही आग लगने की घटनाओं की प्रमुख वजह है। जबकि दूसरी ओर नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 के मुताबिक आग से बचाव के नियम अपनाना जरूरी है। कई अवसरों पर सुप्रीम कोर्ट यह कह चुका है कि आग से बचाव के नियम नहीं अपनाने से जान—माल का नुकसान होता रहा है। यूएचआरएफ की ओर से प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि ऐसे में यह जरूरी है कि आग और जान माल के बचाव के नियमों—गाइडलाइंस का सख्ती से उसके दिशा—निर्देशा के अनुसार अनुपालन किया जाए। 

यूएचआरएफ के सचिव अरूण पाल सिंह कहते हैं कि हम सरकार से  लगातार मांग करते रहे हैं कि नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 को सभी राज्यों—संघ शासित प्रदेशों में लागू किया जाए। लेकिन फिलहाल तक किसी भी राज्य सरकार ने हमारी मांग पर कोई कदम नहीं उठाया है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो, एनसीआरबी, के आंकड़ों के मुताबिक आग की दुर्घटनाओं में प्रतिदिन 62 लोगों की मौत होती है। वहीं, देश को इसकी वजह से हर साल करीब 18 हजार करोड़ रूपये का नुकसान होता है। हर दिन यह सूचना—समाचार सामने आता है कि अमुक जगह पर आग की दुर्घटना की वजह से मासूम लोगों की जान चली गई। वर्ष 2018 में देश में करीब 25 हजार लोग आग की दुर्घटना की वजह से असमय मौत का शिकार हुए या फिर इसमें घायल हुए। यह आंकड़ा बताता है कि आग की दुर्घटना कितनी बड़ी चिंता का विषय है। 

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