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24 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद कैप्टन की रिहाई के लिए 81 साल की मां की गुहार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

By विनीत कुमार | Updated: March 5, 2021 14:00 IST

कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी 1997 से लापता हैं। उनके पाकिस्तान की किसी जेल में बद होने की आशंका है। कैप्टन संजीत की मां की याचिका पर पूरे मामलो के लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

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ठळक मुद्देकैप्टन संजीत भट्टाचार्जी 1997 में गुजरात के कच्छ में पाकिस्तान से लगी सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान लापता हुए थेकैप्टन संजीत भट्टाचार्जी के साथ उनके दस्ते के लांस नाईक राम बहादुर थापा भी लापता हुएपिछले साल कैप्टन संजीत के पिता का हुआ निधन, 81 साल की मां ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया है दरवाजा

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान की जेल में पिछले करीब 24 साल से बंद कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी के जल्द रिहाई या स्वदेश वापसी की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस कैप्टन संजीत की 81 साल की मां की याचिका पर केंद्र को दिया है। 

दरअसल, याचिका में मांग की गई है कि सरकार मानवीय आधार पर इस मामले में दखल दे और कूटनीतिक तरीकों से जल्द से जल्द कैप्टन संजीत के रिहाई के प्रयास करे।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर शुक्रवार को चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की बेंच ने सुनवाई की। 

कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता के वकील से भी पूछा कि क्या वो इस तरह पाकिस्तान की जेल में बंद अन्य सैनिकों की एक पूरी लिस्ट दे सकते हैं। 

कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी का पूरा मामला क्या है

कोर्ट में याचिका में कहा गया है कि कैप्टन संजीत भट्टाचार्जी पाकिस्तान की किसी जेल में पिछले 23 साल और 9 महीने से बंद हैं। वे पाकिस्तान के किस जेल मे है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

कैप्टन संजीत के पाकिस्तान के जेल तक पहुंचने की पूरी घटना 19 और 20 अप्रैल, 1997 से जुड़ी है। याचिका के अनुसार कैप्टन संजीत 19 अप्रैल, 1997 की रात अपने अन्य साथी सदस्यों के साथ गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान से लगने वाले बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के लिए गए थे।

अगले दिन यानी 20 अप्रैल को दस्ते के केवल 15 सदस्य लौटे। कैप्टन संजीत और दस्ते के एक और सदस्य लांस नाईक राम बहादुर थापा इनके साथ नहीं थे। इसके बाद से ही दोनों लापता हैं।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि ये भारत सरकार की ड्यूटी है कि वो अपने हर नागरिक की सुरक्षा को महत्व दे।

बता दें कि कैप्टन संजीत के पिता का पिछले साल नवंबर में निधन हो गया। इससे पहले साल 2005 में रक्षा मंत्रालय ने कैप्टन संजीत को मृत घोषित कर दिया था। 

हालांकि फिर 2010 में राष्ट्रपति सचिवालय ने परिवार को सूचना दी थी कि कैप्टन संजीत का नाम प्रिजनर ऑफ वॉर्स (POWs) में शामिल कर दिया गया है। इसे 'मिसिंग 54' के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही तब बताया गया कि कैप्टन संजीत की वापसी को लेकर पाकिस्तानी उच्च अधिकारियों से बातचीत की जा रही है।

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