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सुप्रीम कोर्ट ने वसुंधरा राजे सरकार को दिया आदेश, 48 घंटे में बंद कराएँ अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन

By भाषा | Updated: October 23, 2018 15:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सबरीमाला मंदिर और सीबीआई घूसखोरी मामले में भी अहम फैसले दिये।

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नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि 48 घंटे के भीतर अरावली पहाड़ियों के 115.34 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन बंद किया जाये।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि वह यह आदेश देने के लिये बाध्य हो गयी क्योंकि राजस्थान सरकार ने इस मामले को ‘‘बहुत ही हल्के’’ में लिया है। 

शीर्ष अदालत ने केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट का भी जिक्र किया कि राज्य के अरावली इलाके में 31 पहाड़ियां अब गायब हो चुकी हैं।

पीठ ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण स्तर में बढ़ोत्तरी का एक कारण राजस्थान में इन पहाड़ियों का गायब होना भी हो सकता है।

पीठ ने अपने आदेश पर अमल के बारे में एक हलफनामा दाखिल करने का राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश भी दिया है। 

न्यायालय अरावली पहाड़ियों में गैरकानूनी खनन की गतिविधियों से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा था। 

सुप्रीम कोर्ट ने आज सबरीमाला और सीबीआई के अफसरों के मामले में भी अहम फैसले सुनाए।

सुप्रीम कोर्ट दिवाली पर पटाखों को लेकर फैसला

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने “हरित” पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की मंगलवार को अनुमति दी जिनसे देश भर में कम उत्सर्जन होगा।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एके सीकरी की पीठ ने दीपावली और अन्य त्योहारों पर आतिशबाजी के लिए रात आठ बजे से रात 10 बजे तक का समय निर्धारित किया।

उच्चतम न्यायालय ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइटों के, अनुमेय सीमा पार करने वाले पटाखे बेचने पर रोक भी लगा दी। 

शीर्ष न्यायालय का आदेश वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक याचिका पर आया है।

सबरीमला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति संबंधी उसके फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई करेगा। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एसके कौल की पीठ ने वकील मैथ्यूज जे नेदुम्पारा से कहा कि उसने याचिकाओं को 13 नवंबर को सूचीबद्ध करने के संबंध में पहले ही आदेश पारित कर दिया है। 

इससे पहले न्यायालय ने कहा था कि मामले में नेशनल अयप्पा डिवोटीज एसोसिएशन और अन्य द्वारा दायर की गई 19 पुनर्विचार याचिकाएं लंबित हैं जिनमें उसके फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। 

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के अनुपात से दिए गए अपने फैसले में कहा था कि केरल के सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए। 

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