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पेगासस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने घेरा मोदी सरकार को, बोले- सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और संसद को किया गुमराह

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: January 29, 2022 17:15 IST

साल 2021 में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों ने इस बात का दावा किया था कि पेगासस के जरिये कई भारतीय नेताओं, मंत्रियों और पत्रकारों सहित तमाम व्यक्तियों की कथित तौर पर जासूसी की गई।

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ठळक मुद्देसुब्रमण्यम स्वामी ने भी न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया हैपेगासस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने विपक्ष का साथ देते हुए सरकार के खिलाफ उठाई ऊंगली स्वामी ने कहा, प्रथम दृष्टया लगता है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और संसद से तथ्यों को छुपाया 

दिल्ली: इस्राइली स्पाईवेयर पेगासस की कथित खरीद के मामले में विपक्ष के तीखे हमले झेल रही मोदी सरकार के लिए उस समय बड़ी ही असहज स्थिति उत्पन्न हो गई जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। पेगासस मामला मोदी सरकार की गले की हड्डी बनता जा रहा है। 

अब इस मामले में विपक्ष के साथ सुब्रमण्यम स्वामी ने भी सुर मिलाते हुए सरकार पर निशाना साधा और ट्वीट करते हुए कहा, मोदी सरकार को निश्चित ही न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी पेगासस खुलासे का खंडन करना चाहिए, जिसमें बताया गया है कि सरकार ने इस्राइली कंपनी एनएसओ को करदाताओं के 300 करोड़ रूपये देकर सदस्यता हासिल की है। इससे प्रथम दृष्टया पता चलता है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और संसद से इस मामले में तथ्यों को छुपाया है। 

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर 'देशद्रोह' का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा, "मोदी सरकार ने हमारे लोकतंत्र की प्राथमिक संस्थाओं, राजनेताओं व जनता की जासूसी करने के लिए पेगासस ख़रीदा था। फ़ोन टैप करके सत्ता पक्ष, विपक्ष, सेना, न्यायपालिका सब को निशाना बनाया है। ये देशद्रोह है।" 

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि साल 2017 में आधुनिक हथियारों और खुफिया उपकरणों की खरीद के लिए भारत और इस्राइल के बीच हुए लगभग दो अरब डॉलर के रक्षा समझौते हुए थे। इस खरीद में कथिततौर पर पेगासस स्पाईवेयर भी शामिल था।

मालूम हो कि बीते साल 2021 में पेगासस का मामला पूरे देश के सामने तब आया था जब कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों के एक संगठन ने इस बात का दावा किया था कि कई भारतीय नेताओं, मंत्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कारोबारियों और पत्रकारों के खिलाफ पेगासस का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया है।

जिसके बाद विपक्ष ने भी मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने साल 2017 में इस्राइल से जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस की खरीद की और देश के कई प्रतिष्ठित नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की जासूसी की गई।

वहीं देश की सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले साल अक्टूबर महीने में विवादित पेगासस के जरिए भारतीय नागरिकों की कथित जासूसी के मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन भी किया था।

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