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आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने को कड़े उपाय किये गए हैं: जितेंद्र सिंह

By भाषा | Updated: August 29, 2021 23:50 IST

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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि सीमापार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और हालांकि इसे काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन हो सकता है कि इस पर पूरी तरह से लगाम न लगी हो।कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि प्रभावी सीमा बाड़ लगायी गई और ‘थर्मल डिटेक्शन’ भी किया जाता है लेकिन सुरक्षा बलों को सीमापार से आने वाले घुसपैठियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भूमिगत सुरंगों का पता चला है।सिंह ने कहा कि सुरक्षा बल पूरी ईमानदारी और लगन से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं, लेकिन इन भूमिगत मार्गों की पहचान और जांच में सहयोग करना स्थानीय आबादी की भी जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा, ‘‘सीमा पर आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, जिस पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है लेकिन हो सकता है कि इसे पूरी तरह से रोका नहीं जा सका हो।’’नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पारिवारिक बंकरों के निर्माण, सीमावर्ती इलाकों में आधुनिक घरेलू शौचालयों और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सड़कों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई संवेदनशील फैसले लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया है, उन्हें अपने ड्राइंग रूम में बैठकर निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पारिवारिक बंकर देखने चाहिए।इस समारोह के आयोजन स्थल से बमुश्किल 10 से 12 किलोमीटर दूर इलाके में सीमा पर गोलीबारी की स्थिति में लंबे समय तक रहने और आश्रय के लिए सभी सुविधाओं वाले पारिवारिक बंकर बनाये गए हैं जो लगभग एक कमरे के आवासीय फ्लैट के बराबर हैं। सिंह ने कहा कि असली सवाल यह है कि पिछली सरकारों ने बंकरों की लोगों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा क्यों नहीं किया। मंत्री ने रियासी में एक समारोह में भी भाग लिया, जिसका आयोजन दिव्यांगों के लिए काम करने वाली एक सामाजिक संस्था ‘सक्षम’ द्वारा किया गया था। सिंह ने कहा कि मोदी सरकार का दृष्टिकोण समाज के कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण और यह सुनिश्चित करना है और उन्हें उचित सम्मान मिले।उन्होंने कहा कि इसके लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने हाल के दिनों में तेजाब हमले के पीड़ित सहित 'दिव्यांगों' के लिए नौकरियों में आरक्षण कोटा बढ़ाने जैसे कई अहम फैसले लिए हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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