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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद यूपी-बिहार समेत 9 राज्यों ने NCPCR को नहीं करने दिया था शेल्टर होम का ऑडिट

By पल्लवी कुमारी | Published: August 09, 2018 8:26 AM

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे नौ राज्यों का पता चला है जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बनाई गई ऑडिट करने वाली एजेंसी की पहुंच से ये बालिका गृह दूर थे।

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नई दिल्ली, 9 अगस्त: बिहार के मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया शेल्टर होम केस ने देश में महिलाओं की स्थिति के पोल खोल दिए है। इन दोनों केस में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे नौ राज्यों का पता चला है जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बनाई गई ऑडिट करने वाली एजेंसी की पहुंच से ये बालिका गृह दूर थे। जिसकी वजह ये थी कि ये नौ राज्यों ने इस ऑडिट से साफ इनकार कर दिया था। 

नैशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR)और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की और से देश के सभी राज्यों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन अनुसार ही शेल्टर होम चलाने को कहा गया था। लेकिन राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश , बिहार, केरल, छत्तीसगढ़, मणिपुर, मेघालय, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई ऑडिट एजेंसी को जांच करने की अनुमति नहीं दी थी। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस लिस्ट में पहले ओडिशा का भी नाम था। लेकिन केंद्र के हस्तक्षेप की वजह से यह ऑडिट के लिए तैयार हो गया था। बाकी नौ राज्यों का ये कहना था कि वह ऑडिट खुद करवाना चाहते हैं। एनसीपीसीआर (NCPCR) के मुताबिक देश में 5,850 रजिस्टर्ड बालगृह हैं और 1,339 का रजिस्ट्रेशन अभी शेष है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 2017 में 31 दिसंबर की तारीख की तय की थी।  NCPCR के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मई में ऑडिट एजेंसी ने इस बात की सूचना दी कि 10 राज्य उसे जांच करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक देश में ऐसी और कई संस्थाए चल रही हैं, जो एनसीपीसीआर (NCPCR) की सूचि में शामिल नहीं है। यही वजह है कि सभी बालिका गृह का ऑडिट करना काफी मुश्किल है। बता दें कि बिहार में 71 बालगृह चलते हैं और यूपी में इनकी संख्या 231 है। उत्तर प्रदेश के बालिक गृह का ऑडिट लखनऊ की अकैडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज को टेंडर प्रॉसेस द्वारा किया जाता है। 

मुजफ्फरपुर का मामला

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ सीबीआई ने कार्रवाई की है। सीबीआई ने ब्रजेश ठाकुर के बैंक अकाउंट को सीज कर दिया है। साथ ही सीबीआई ब्रजेश ठाकुर के बाकी संपत्तियों की भी जांच कर रही है। 

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस), मुम्बई द्वारा अप्रैल में राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले सामने आया था।

बालिका गृह में रहने वाली 42 में से 34 लड़कियों के चिकित्सकीय परीक्षण में उनके साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह का मालिक बृजेश ठाकुर इस मामले में मुख्य आरोपी है। इस मामले में 31 मई को 11 लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ठाकुर समेत 10 लोगों को तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। एक व्यक्ति फरार है। 

बिहार पुलिस ने 26 जुलाई को इन आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। राज्य सरकार ने 26 जुलाई को इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी और बाद में सीबीआई ने इसकी जांच राज्य पुलिस से अपने हाथ में ले ली थी।

यौन उत्पीड़न कांड का खुलासा होने के बाद से पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के परामर्श के साथ संस्थागत प्रणालियां विकसित करने को कहा है। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है क्योंकि समाज में सभी तरह के लोग रहते हैं और वे एक छोटा सा मौका मिलते ही गलत काम में शामिल हो सकते हैं।” 

देवरिया का मामला

देवरिया शेल्टर होम केस में एक बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस केस के शुरुआती जांच के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ  की सरकार ने भी माना है कि देवरिया के बालिका गृह में बच्चियों का शारीरिक शोषण हुआ। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने भी यह बात स्वीकार की है कि शेल्टर होम में लड़कियों का शारीरिक शोषण होता था।

रविवार 6 अगस्त को यूपी पुलिस संरक्षण गृह पर छापा मारकर  24 लड़कियों को वहां से मुक्त करवाया था। छापा मारा गया तो  42 में से 18 लड़कियां गायब मिलीं थी। मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि इस शेल्टर होम में देह व्यापार का धंधा पिछले एक सालों से चल रहा था।

पुलिस अधीक्षक रोहन पी. कनय ने बताया कि मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा शहर कोतवाली क्षेत्र में संचालित बाल एवं महिला संरक्षण गृह में रहने वाली एक लड़की रविवार को महिला थाने पहुंची और संरक्षण गृह में रह रही लड़कियों को कार से अक्सर बाहर ले जाये जाने और सुबह लौटने पर उनके रोने की बात बतायी। शिकायत करने वाली लड़की बिहार के बेतिया की रहने वाली बतायी जाती है।

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(भाषा इनपुट)

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