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लॉकडाउन में पूरी सैलरी, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, कंपनियों पर कार्रवाई ना करें सरकार

By निखिल वर्मा | Updated: June 12, 2020 12:12 IST

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को पूरा पारिश्रमिक देने में असफल रहे निजी प्रतिष्ठानों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए.

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ठळक मुद्देउद्योगों और श्रमिकों को एक दूसरे की जरूरत है और पारिश्रमिक के भुगतान विवाद को हल करने के प्रयास किये जाने चाहिएन्यायालय ने राज्यों से कहा कि वे उद्योगों और कर्मचारियों के बीच पारिश्रमिक विवाद का निबटारा करायें और श्रम आयुक्त को अपनी रिपोर्ट दें। न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को पूरा पारिश्रमिक देने संबंधी 29 मार्च के सर्कुलर की वैधता पर केन्द्र से चार सप्ताह में मांगा हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान सरकारी आदेश बावजूद अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं देने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर फैसला सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने नियोक्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। कर्मचारियों की सैलरी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 4 हफ्ते में जवाब मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तब तक उद्योगों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के श्रम विभागों के कर्मचारियों और नियोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए बातचीत की जाएगी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि उद्योगों और श्रमिकों को एक दूसरे की जरूरत है और उन्हें पारिश्रमिक के भुगतान का मुद्दा एक साथ बैठकर सुलझाना चाहिए।

गृह मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर सभी कंपनियों और नियोक्ताओं को निर्देश दिया था कि वे अपने यहां कार्यरत सभी श्रमिकों और कर्मचारियों को बगैर किसी कटौती के लॉकडाउन की अवधि में पूरे पारिश्रमिक का भुगतान करें। श्रम एवं रोजगार सचिव ने भी सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था जिसमें नियोक्ताओं को यह सलाह देने के लिये कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के मदेनजर वे अपने कर्मचारियों को नहीं हटायें ओर न ही उनका पारिश्रमिक कम करें।सुप्रीम कोर्ट ने इसी मसले पर फैसला सुनाया है।

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