लाइव न्यूज़ :

प्रयागराज: कोरोना काल की तरह फाफामऊ घाट पर आज भी भारी तादात में दफनाए जा रहे है लाश, प्रशासन और NGT की रोक के वाबजूद भी यहां बन रहे है कब्र

By आजाद खान | Updated: May 19, 2022 12:00 IST

इस घाट पर लाशों के दफनाने को लेकर लोगों में अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का कहना है कि घाट पर सही से सुविधा प्रदान नहीं की गई है तो वहीं कुछ और लोगों का कहना है कि वे अपने परंपरा के मुताबिक ही ऐसे लाशों को दफना रहे हैं।

Open in App
ठळक मुद्देकोरोना काल की तरह ही प्रयागराज के फाफामऊ घाट पर लाशों को दफनाया जा रहा है। ऐसे दफनाने के पीछे लोगों के अलग-अलग मत हैं। प्रशासन और एनजीटी के रोक के बावजूद भी यहां पर कब्रें दिख रही है।

लखनऊ: प्रयागराज के फाफामऊ घाट पर एक फिर से कोरोना काल की तरह ही घाटों पर भारी तादात में शवों को दफनाया जा रहा है। आपको बता दें कि घाट पर इस तरीके से लाशों को दफनाने पर रोक लगा है। यब रोक प्रशासन और एनजीटी की ओर से लगी है। लेकिन रोक के बावजूद, अब भी भारी तादात में लाशों को वहां दफन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस घाट पर हर रोज दर्जन भर लाशों को दफन किया जा रहा है और इसके खिलाफ किसी पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही है। ऐसे में यहां पर लाशों की संख्या को देख कर कोरोना काल की यादें सामने आ जा रही है जब इसी घाट पर लाशों का ढेर दिखाई दिया था। इस तरह से लाशों को दफनाने को लेकर स्थानीय लोगों के अलग-अलग मत है। 

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, फाफामऊ घाट पर हर रोज भारी तादात में लाशों को लाया जा रहा है और यहां दफन किया जा रहा है। कोरोना काल से हालात को देखते हुए इस घाट पर लाशों के अंतिम संस्कार के लिए मना किया गया है। यह आदेश प्रशासन और एनजीटी द्वारा दी गई है। लेकिन इसके बावजूद भी हर रोज भारी तादात में यहां लाशों को दफनाया जा रहा है। मानसून के आने में बस कुछ ही दिन बचे है, ऐसे में जल स्तर बढ़ने से यह आशंका जताई जा रही है कि इन लाशों के गंगा नदी में समा जाने से लाशों को नदी में तैयरते देखे जा सकते है। तब यह स्थिति वैसी ही हो जाएगी जैसे कोरोना काल में गंगा में बहती हुई लाशों की थी। 

दफनाने को लेकर लोगों की अलग मत

आपको बता दें कि घाट पर इस तरह के कब्र को पाए जाने पर वहां के लोग अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ लोगों को कहना है कि घाट पर सही से व्यवस्था नहीं तो कुछ ने इसे परंपरा का नाम दिया है। वहां के लोगों का कहना है कि अगर फाफामऊ घाट पर विद्युत शवदाह गृह और अंतिम स्संकार के लिए समय पर लकड़ियां मौजूद हो तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वहीं कुछ और लोगों का कहना है कि वे ऐसा अपने परंपरा के अनुसार करते है। 

आपको बता दें कि कोरोना काल में जब यह खबर चली थी कि गंगा किनारे भारी मात्रा में शवों को दफनाया जा रहा है, ऐसे में प्रशासन ने एक्शन लेते हुए रेत से उन शवों को निकाल कर उनका अंतिम संस्कार किया था। लेकिन अब यहां शवों के दफनाने पर लगी रोक के बावजूद भारी मात्रा में हर रोज शवों को रेत में दफनाया जा रहा है।  

टॅग्स :उत्तर प्रदेशप्रयागराजCoronaकोविड-19 इंडियाकोरोना वायरसNational Green Tribunal
Open in App

संबंधित खबरें

भारतवाराणसी का रोम-रोम हुआ रोमांचित, दर्शकों ने देखा कैसा था सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन, देखें Photos

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?

क्राइम अलर्टUP VIRAL VIDEO: 1 साल पहले निकाह, तलाक के बाद मायके रह रही है पूर्व पत्नी रेशमा?, पति रहीस ने बाइक में बांधकर घसीटा, वीडियो

कारोबारयूपी में 10 वर्ष में ऐसे बढ़ा बजट का आकार?, 8.65 लाख करोड़ रुपए में से 2.85 लाख करोड़ रुपए नहीं हुए खर्च?

भारतKushinagar Accident: नहर में गिरी श्रद्धालुओं से भरी ट्रॉली; 3 की मौत, 18 की हालत गंभीर

भारत अधिक खबरें

भारतराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीः उत्तरार्द्ध में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'