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NRC डाटा सुरक्षित, कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए, जिन्हें जल्द ही हल कर लिया जाएगा: गृह मंत्रालय

By भाषा | Updated: February 13, 2020 07:14 IST

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ठळक मुद्देविवादास्पद एनआरसी का डाटा ऑफलाइन होने को लेकर चिंताओं के बीच केन्द्र ने बुधवार को कहा कि एनआरसी का डाटा सुरक्षित है, हालांकि कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए और उन्हें जल्द ही हल कर लिया जाएगा। वहीं देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी विप्रो ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण ने परियोजना के सेवा अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया। इसके अनुबंध की समयसीमा अक्टूबर 2019 में ही समाप्त हो गयी थी।

विवादास्पद एनआरसी का डाटा ऑफलाइन होने को लेकर चिंताओं के बीच केन्द्र ने बुधवार को कहा कि एनआरसी का डाटा सुरक्षित है, हालांकि कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए और उन्हें जल्द ही हल कर लिया जाएगा। वहीं देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी विप्रो ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण ने परियोजना के सेवा अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया। इसके अनुबंध की समयसीमा अक्टूबर 2019 में ही समाप्त हो गयी थी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण उन खबरों के मद्देनजर आया है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची का डेटा उसकी आधिकारिक वेबसाइट से ऑफलाइन हो गया है। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एनआरसी डेटा सुरक्षित है। क्लाउड पर कुछ तकनीकी मुद्दे देखे गए। इन्हें जल्द ही हल किया जा रहा है।’’

विप्रो कंपनी ने कहा कि लंबी नीलामी प्रक्रिया के बाद विप्रो को 2014 में असम की एनआरसी प्रणाली को व्यवस्थित करने की परियोजना के लिये चुना गया था। कंपनी ने ईमेल के जरिये जारी एक बयान में कहा कि उसने सद्भावना दिखाते हुए मेजबान सेवा शुल्क का भुगतान जनवरी के अंत तक जारी रखा। उसने कहा कि यदि प्राधिकरण अनुबंध का नवीनीकरण करता है तो वह ये सेवाएं पुन: मुहैया कराने को तैयार है।

कंपनी ने कहा, ‘‘परियोजना भारत के महापंजीयक अैर गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गयी थी और उच्चतम न्यायालय इस परियोजना की निगरानी कर रहा था। विप्रो को आईटी सेवा प्रदाता के नाते प्रौद्योगिकी की संरचना तथा तकनीकी समाधान मुहैया कराने का काम दिया गया था।’’ कंपनी के बयान से कुछ ही देर पहले केंद्र सरकार ने कहा कि असम का एनआरसी डेटा सुरक्षित है। कुछ तकनीकी समस्याएं दिख रही हैं, जिन्हें शीघ्र ही दूर कर लिया जायेगा।

विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह ‘‘दुर्भावनापूर्ण’’ और ‘‘जानबूझकर’’ की गई कार्रवाई है। एनआरसी के राज्य संयोजक हितेश देव शर्मा ने माना कि डेटा ऑफलाइन हो गया है लेकिन उन्होंने इसके पीछे किसी तरह की ‘‘दुर्भावना’’ के आरोप को खारिज किया। बड़े पैमाने पर डेटा के लिए क्लाउड सेवा आईटी कंपनी विप्रो ने मुहैया कराई थी और उनका अनुबंध पिछले साल 19 अक्टूबर तक का था।

बहरहाल, पूर्व संयोजक ने इस अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया। शर्मा ने बताया कि इसलिए विप्रो द्वारा निलंबित किए जाने के बाद 15 दिसंबर से डेटा ऑफलाइन हो गया था। उन्होंने बताया कि राज्य संयोजक समिति ने 30 जनवरी को अपनी बैठक में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का फैसला किया और फरवरी के पहले सप्ताह के दौरान विप्रो को पत्र लिखा।

शर्मा ने कहा, ‘‘एक बार जब विप्रो डेटा को ऑनलाइन कर देगी तो यह जनता के लिए उपलब्ध होगा। हमें उम्मीद है कि लोगों को अगले दो-तीन दिनों में डेटा उपलब्ध हो जाएगा।’’ एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित होने के बाद असली भारतीय नागरिकों को शामिल किए जाने तथा बाहर किए गए लोगों की पूरी जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट http://www.nrcassam.nic.in पर अपलोड की गई।

इस बीच आईटी कंपनी विप्रो के साथ अनुबंध के समय पर नवीनीकरण नहीं होने संबंधी बात राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) प्राधिकरण के स्वीकार किये जाने के एक दिन बाद बुधवार को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के समक्ष एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया गया। इस आरटीआई आवेदन में आईटी फर्म के साथ समझौते का विवरण मांगा गया है।

हालांकि एनआरसी प्राधिकरण ने सूचना ऑफलाइन होने वाली जानकारी में कुछ भी गलत होने से इनकार किया है। वरिष्ठ पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने सरकार की आईटी शाखा एनआईसी के पास एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया और अपने ट्विटर अकाउंट के जरिये इसे सार्वजनिक किया।

उन्होंने असम की आधिकारिक एनआरसी सूची की ‘ऑनलाइन होस्टिंग’ और संग्रहण के बारे में विप्रो के साथ समझौते की एक प्रति मांगी है। असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया ने भारत के महापंजीयक को पत्र लिखा और उनसे मामले को तत्काल देखने का अनुरोध किया। 

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