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NLMC: राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम के गठन को मिली मंजूरी, रेलवे, रक्षा जैसे विभागों की अतिरिक्त जमीनें अब बेचेगी सरकार

By आजाद खान | Updated: March 10, 2022 12:52 IST

आपको बता दें कि सीपीएसई के पास बड़ी तादाद में ऐसी जमीनें व भवन हैं, जिनका कम इस्तेमाल हो रहा है या बिलकुल इस्तेमाल नहीं हो रहा है या ये बेकार पड़े हैं।

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ठळक मुद्देमोनेटाइजेशन या मुद्रीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 'राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम' (NLMC) के गठन को मंजूरी मिल गई है।आपको बता दें सीपीएसई के पास बड़ी तादाद में ऐसी जमीनें व भवन हैं, जिनका कम इस्तेमाल हो रहा है।

NLMC: मोनेटाइजेशन या मुद्रीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत 'राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम' (NLMC)  के गठन को मंजूरी मिली है। आपको बता दें कि कई ऐसे नवगठित निगम बंद पड़े या बंद होने की कगार पर पहुंचे या उन्हें बेचे जा रहे है। अब सरकार इन बंद नवगठित निगमों को सार्वजनिक उद्यमों (PSUs)  की अतिरिक्त भूमि का मुद्रीकरण करेगा। इसका मतबल यह हुआ कि सरकार अब इन संस्थानों की अतिरिक्त जमीनों को बेचकर राजस्व को जुटाएगी। गौरतलब है कि एनएलएमसी का गठन भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली एक कंपनी के रूप में होगा। 

आरंभिक अधिकृत अंश पूंजी होगी 5 हजार करोड़ रुपए

इस 'राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण निगम' (NLMC) की आरंभिक अधिकृत अंश पूंजी 5 हजार करोड़ रुपए होगी, जबकि चुकता अंश पूंजी 150 करोड़ रुपए तय की गई है। इस मामले में एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों व अन्य सरकारी एजेंसियों की अतिरिक्त भूमि या भवनों के मुद्रीकरण का काम करेगा। 

जानने वाली बात यह है कि इसके तहत उन बेकार पड़ी जमीनों व भवनों को बेचा जाएगा, जिनकी सरकार को जरूरत नहीं है। इनका नकदीकरण कर सरकार के खजाने को भरा जाएगा। वहीं गैर-प्रमुख संपत्तियों के मुद्रीकरण के साथ, सरकार अप्रयुक्त और कम उपयोग वाली संपत्तियों का मुद्रीकरण करके पर्याप्त राजस्व जुटाने में सक्षम होगी। 

बेकार जमीनों को किया जाएगा इस्तेमाल

फिलहाल सीपीएसई के पास बड़ी तादाद में ऐसी जमीनें व भवन हैं, जिनका कम इस्तेमाल हो रहा है या बिलकुल इस्तेमाल नहीं हो रहा है। या यह कह ले कि ये बेकार पड़े हैं। वहीं इनके विमुद्रीकरण से इन जमीनों व भवनों का जहां उत्पादक कार्यों में उपयोग हो सकेगा, वहीं इससे निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा और नई आर्थिक गतिविधियां शुरू हो सकेंगी। इसके साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक व सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय संसाधन पैदा किए जा सकेंगे।

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