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NGT ने कूड़ा मैनेजमेंट में फेल बंगाल सरकार पर लगाया 3,500 करोड़ रुपये का जुर्माना

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 4, 2022 14:18 IST

दिल्ली में एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने बंगाल सरकार को ठोस कचरा प्रबंधन के निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन का दोषी पाते हुए उसे आदेश दिया किया कि वो उसकी क्षतिपूर्ति के एवज में 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करे।

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ठळक मुद्देएनजीटी ने बंगाल सरकार पर कूड़ा प्रबंधन में फेल होने पर 3,500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगायाजुर्माने की धनराशि का इस्तेमाल बंगाल में ही कूड़ा प्रबंधन के बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगाएनजीटी के इस आदेश के खिलाफ बंगाल सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का आखिरी रास्ता बचा है

दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बंगाल सरकार के द्वारा कूड़ा प्रबंधन में तय मानकों के उल्लंघन के मामले में 3,500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। दिल्ली में एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने बंगाल सरकार के खिलाफ ठोस कचरा प्रबंधन के निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन का दोषी पाते हुए उसे आदेश दिया किया कि वो उसकी क्षतिपूर्ति के एवज में 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान करे।

समाचार वेबसाइट 'द टेलीग्राफ' के मुताबिक एनजीटी के इस आदेश के खिलाफ बंगाल सरकार के पास अब अंतिम विकल्प के तौर पर केवल सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा है। हालांकि एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने जिस "क्षतिपूर्ति" का आदेश दिया है, उसके मद में जारी होने वाली धनराशि का इस्तेमाल बंगाल में ही कूड़ा प्रबंधन के बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा।

इस संबंध में बगाल सरकार के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा, “अभी हमें एनजीटी से मिले आदेश की विस्तार से समीक्षा करनी है लेकिन अभी तक मैं जितना समझ पा रहा हूं, वास्तव में यह कोई जुर्माना नहीं है। एनजीटी का आशय है कि 3,500 करोड़ रुपये ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए उपयोग में लाये जाने वाली धनराशि को अलग से रखा जाए।"

एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने अपने आदेश में बंगाल सरकार को दो महीने के भीतर यह धनराशि ठोस कचरा मैनेजमेंट के लिए एक अलग खाते में जमा कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही बेंच ने कहा कि अलग खाते में जमा की गई धनराशि कचरा प्रबंधन शहरी विकास सचिव के द्वारा नहीं बल्कि मुख्य सचिव के दिशा-निर्देशों के अनुसार खर्च की जाएगी। मौजूदा समय में राज्य में कचरा प्रबंधन का अधिकार शहरी विकास सचिव के पास है और यह उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आता है।

3,500 करोड़ रुपये के जरिये प्रदेश के पर्यावरण को बेहतर बनाने और ठोस कूड़े के मैनेजमेंट के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग के लिए किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर एक योजना रिपोर्ट एनजीटी के सामने पेश करनी होगी।

एनजीटी के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और स्पेशल मेंबर ए. सेंथिल वेल की प्रिंसिपल बेंच ने एक सितंबर को दिये आदेश में कहा, "उपरोक्त विवाद में राज्य सरकार ने निर्धारित मानदंडों का घोर उल्लंघन किया है। इस कारण पर्यावरण को हुए नुकसान पर विचार करते हुए हम आदेश देते हैं कि राज्य सरकार जल्द से जल्द 3,500 करोड़ रुपये के क्षतिपूर्ति के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करे।"

एनजीटी के इस कार्रवाई में राज्य के मुख्य सचिव एचके द्विवेदी भी मौजूद थे। एनजीटी ने मामले में 61 पन्नों के आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दिल्ली में वरिष्ठ पर्यावरण वकील ऋत्विक दत्ता ने कहा, “एनजीटी की ओर 3,500 करोड़ रुपये के क्षतिपूर्ति का आदेश पर्यावरणीय आधार पर भारत में अब तक की तय की गई सबसे बड़ी धनराशि है। अब तक एनजीटी ऐसे उल्लंघन के मामलों में औसत जुर्माना 30-40 करोड़ रुपये कर का लगाती थी लेकिन पहली बार क्षतिपूर्ति की अधिकतम राशि 300 करोड़ रुपये को पार कर गई है।"

इसके साथ ही वकील ऋत्विक दत्ता ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के इस आदेश के खिलाफ बंगाल सरकार के पास मात्र एक ही विकल्प बचा है और वो है कि 3,500 करोड़ रुपये के क्षतिपूर्ति का आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए और वहां पर सुप्रीम कोर्ट अगर राज्य सरकार के तर्कों से सहमत होगा तो हो सकता है कि  भारी जुर्माना को उलट दे और अगर ऐसा नहीं हुआ तो बंगाल सरकार को हर हाल में एनजीटी के दिये 3,500 करोड़ रुपये के क्षतिपूर्ति के आदेश का पालन करना होगा। 

टॅग्स :National Green TribunalWest Bengal
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