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बेटों से मिली थी दुत्‍कार तो बेटियों ने दी मां की चिता को आग, समाधि को कंधे पर उठाकर 4 किमी दूर ले गई थीं श्मशान घाट

By आजाद खान | Updated: January 3, 2022 14:57 IST

बहनों के मुताबिक, उसके भाई मां को करीब 10 साल से नजरअंदाज कर रहे थे। वे लोग कभी भुल कर भी उसक हाल नहीं पूछते थे।

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ठळक मुद्देपूरी में 4 बेटियों द्वारा पुरे रीति रिवाज के साथ अपनी मां के अंतिम संस्कार करने की बात सामने आई है। इस पर पड़ोसियों का कहना है किजाति नायक के बेटों ने उसके अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। बहनों ने आईयों पर मां का हाल तक नहीं पूछने का आरोप लगाया है।

पुरी: ओडिशा के पुरी से एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है। यहां पर एक महिला के चार बेटियों ने अपनी मां का अंतिम संस्कार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी की रहने वाली जाति नायक के देहांत के बाद पड़ोसियों ने उसके बेटों से संपर्क किया था। अपनी मां की मौत की खबर सुनकर भी उसके बेटों पर कोई दुख नहीं दिखाई दिया और वे मां के अंतिम संस्कार करने के बात पर भी कुछ जवाब नहीं दिया। वहीं जब जाति की बेटियों को उनकी मां के मरने की खबर मिली तो उन्हें इससे काफी दुख हुआ और वे भाग कर अपने घर आईं। बता दें कि जब बहनों को पता चला कि उसके भाई मां के अंतिम संस्कार में नहीं आएंगे तो बहनों ने खुद से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। इसके बाद विधी के अनुसार उन लोगों ने अपनी मां की चिता को आग दिया है। 

क्यों नहीं भाईयों ने किया मां का अंतिम संस्कार

बहनों के मुताबिक, उसके भाई उसकी मां को पसंद नहीं करते थे। वे उसका हाल तक नहीं पूछते थे। बहनों का यह भी कहना था उसके भाई मां को पिछले 10 साल से नजरअंदाज कर रहे थे और उसको साथ में भी नहीं रखते थे। बेटियों का यह भी आरोप है कि मां के देहांत से पहले जब वे बीमार पड़ी थी तब भी उसके भाईयों ने उनका कोई खबर नहीं लिया था। उन लोगों ने यह भी बताया कि पिता के मौत के बाद उसकी मां ने फेरीवाले का काम करके उन लोगों को पाला था। 

बेटियों ने किया मां का अंतिम संस्कार

जब भाईयों ने अपने फर्ज अदा करने से इंकार कर दिया तो बेटियों ने मां के अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन लोगों ने पड़ोसियों के साथ मिलकर पुरे रीति रिवाज के साथ अपनी मां को अंतिम बिदाई दी। बेटियों ने पहले मां के शव को घर के बाहर रखा, जिसमें कुछ और पड़ोसियों ने उनकी मदद भी की। इसके बाद उन्होंने अर्थी तैयार की और उसे अपने कंधे पर रखकर अंतिम संस्कार के लिए चार किलोमीटर श्मशान घाट तक ले गईं।

टॅग्स :ओड़िसापूरी
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