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Nagaland Violence: नागालैंड हिंसा के बाद सीएम नेफ्यू रियो ने की 'अफस्पा' को हटाने की मांग

By रुस्तम राणा | Updated: December 6, 2021 14:17 IST

राज्य के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने इस विवादित कानून को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हम केंद्र सरकार से कह रहे हैं कि नागालैंड से AFSPA को हटाया जाए क्योंकि इस कानून ने हमारे देश की छवि धूमिल कर दी है।

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ठळक मुद्देनागालैंड के सीएम ने अफस्पा कानून को बताया कठोरसीएम रियो ने इस कानून को राज्य से तुरंत हटाने की मांग की

कोहिमा: नागालैंड हिंसा के बाद राज्य से अफस्पा कानून को हटाने की मांग होने लगी है। राज्य के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने इस विवादित कानून को हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हम केंद्र सरकार से कह रहे हैं कि नागालैंड से AFSPA को हटाया जाए क्योंकि इस कानून ने हमारे देश की छवि धूमिल कर दी है। राज्य के मोन जिले में सीएम रियो सेना द्वारा मारे गए लोगों के अंतिम सरकार में पहुंचे थे। जहां उन्होंने अफस्पा को लेकर कहा कि यह कानून कठोर है। नागालैंड चाहता है कि राज्य से अफस्पा को तुरत हटाया जाए।     

सीएम ने कहा - गृहमंत्री जी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं

राज्य के सीएम ने आम नागरिकों की हत्या पर कहा कि गृह मंत्री जी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, हमने घटना में प्रभावित लोगों को सहायता राशि दी है। आपको बता दें कि राज्य सरकार की ओर से मृतक नागरिकों के परिजनों को 5-5 लाख रूपये मुआवजा राशि देने का ऐलान किया था। साथ ही राज्य की ओर से यह भी यह भी घोषणा की गई थी कि उनकी ओर से सभी घायल लोगों का इलाज कराया जाएगा। सरकार ने मामले की जाँच के लिए उच्च स्तरीय एसआईटी के गठन का भी फैसला किया है।

क्या है अफस्पा कानून और किन राज्यों में है लागू?

अफस्पा (AFSPA) कानून के तहत केंद्र सरकार राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर किसी राज्य या क्षेत्र को अशांत घोषित कर वहां केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करती है। अफस्पा के तहत सशस्त्र बलों को कहीं भी अभियान चलाने और बिना पूर्व वारंट के किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त है। पूर्वोत्तर में असम, नगालैंड, मणिपुर (इंफाल म्यूनिसिपल काउंसिल क्षेत्र को छोड़ कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगडिंग और तिरप जिले के अलावा असम सीमा से सटे राज्य के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों में अफस्पा लागू है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने लंबे समय तक उठाया था यह मुद्दा

इससे पहले लंबे वर्षों तक मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाली इरोम चानू शर्मिला ने पूर्वोत्तर राज्यों से इस कानून को हटाने की मांग की थी। लेकिन उनके चुनाव में उतरने और हार के बाद यह मुद्दा ठंडा पड़ गया था। हालांकि कई सामाजिक और राजनैतिक संगठन इस कानून के विरोध में अपनी आवाज को उठाते रहे हैं। लेकिन नागालैंड में सुरक्षाबलों के अभियान में मारे गए 13 आम नागरिकों की वजह से यह मुद्दा एकबार से उठने लगा है। आज संसद में विपक्षी पार्टियों ने नागालैंड हिंसा को लेकर हंगामा किया।  

टॅग्स :नागालैंडCenter
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