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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होने तक जहांगीरपुरी में टूट चुकी थीं कई दुकानें

By योगेश सोमकुंवर | Updated: April 20, 2022 18:24 IST

जहांगीरपुरी में कथित अतिक्रमण को जमींदोज करने पहुंची एमसीडी के दस्ते ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी आदेश की कॉपी न मिलने की बात कहते हुए बुलडोजर की कार्रवाई जारी रखी।

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ठळक मुद्देएमसीडी का दस्ता दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के साथ जहांगीरपुरी में बुलडोजर लेकर पहुंचा थासुप्रीम कोर्ट ने सुबह 10:45 पर जहांगीरपुरी में बुलडोजर कार्रवाई को रोकने का आदेश दियाएमसीडी ने कार्रवाई को जारी रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी उन्हें नहीं मिली है

दिल्ली: कथित अवैध निर्माणों को ढहाने का हथियार बना बुलडोजर आज दिल्ली के जहांगीरपुरी में भी जमकर चला। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता की चिट्ठी के बाद नींद से जागी उत्तर दिल्ली नगर निगम ने बुधवार को हिंसा प्रभावित जहांगीरपुरी में बुलडोजर से दुकानें तोड़ने की कार्यवाई को अंजाम दिया।

सुबह 10 बजे से ही दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के पूरे दल बल के साथ जहांगीरपुरी में बुलडोजर तैनात कर दिए गए थे लेकिन कुछ देर बाद करीब 10:45 पर देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम की कथित अतिक्रमण हटाने पर इस कार्रवाई को रोकने का आदेश दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मिलने की बात कहते हुए एमसीडी ने बुलडोजर की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद भी जारी रखी। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे के प्रधान न्यायाधीश के सामने दोबारा अपील की जिसके बाद जा कर इस कार्रवाई को रोका जा सका।

जब तक कोर्ट के आदेश का पालन होता तब तक जहांगीरपुरी में कई दुकान टूट चुकी थीं। 1977 से यहां जूस की दुकान चला रहे गणेश गुप्ता के मुताबिक अपनी दुकान पर बुलडोजर चलने से पहले उन्होंने पुलिस और एमसीडी के अधिकारियों को सारे कागज दिखाए लेकिन किसी ने उनकी एक ने सुनी, यहीं कहानी दिलीप सक्सेना की भी है।

जहांगीरपुरी में बुलडोजर की कार्रवाई के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। पहला तो ये कि सुप्रीम कोर्ट के कार्यवाई रोकने आदेश के बाद भी जहांगीरपुरी में बुलडोजर क्यों चलता रहा? दूसरा, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के खत के बाद ही क्यों बीजेपी शासित उत्तर दिल्ली नगर निगम ने कार्यवाई की?

क्या एमसीडी को जहांगीरपुरी में अवैध अतिक्रमण की जानकारी पहले से नहीं थी, अगर जानकारी थी तो भी क्या सांप्रदायिक तनाव के बीच ही इस कार्रवाई को कुछ दिन टाला नहीं जा सकता था। ऐसे कई सवालों का जवाब अब बुलडोजर चलाने वालों को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान तो देना ही होगा।

टॅग्स :जहांगीरपुरी सांप्रदायिक हिंसासुप्रीम कोर्टदिल्लीBJP
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