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निर्विरोध चुनाव जीतना लोकतंत्र के लिए अच्छा, विपक्ष चाहे तो कोर्ट जाए?, बावनकुले ने कहा-ठाकरे भाई भीड़ तो जुटा लेंगे, वोट में तब्दील करें?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 5, 2026 16:40 IST

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग से उन नगर निकाय वार्डों 68 के नतीजे रद्द करने की अपील करने के बाद आई है।

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ठळक मुद्दे निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया। तो यह एक अच्छी परंपरा है। निर्विरोध जीतने वालों का एजेंडा विकास होता है।राज ठाकरे ने रविवार को भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

छत्रपति संभाजीनगरः महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को कहा कि निकाय चुनावों में निर्विरोध जीत “लोकतंत्र के लिए अच्छी बात” है और विपक्षी दल यदि चाहें तो न्याय के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं। यहां चिकलथाना हवाई अड्डे पर भाजपा नेता ने संवाददाताओं से कहा कि ऐसा कोई लिखित नियम नहीं है कि निर्विरोध चुनाव नहीं हो सकते और निर्वाचन आयोग इसकी अनुमति देता है। बावनकुले की यह टिप्पणी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग से उन नगर निकाय वार्डों 68 के नतीजे रद्द करने की अपील करने के बाद आई है,

जहां निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया। ठाकरे ने चेतावनी दी थी कि लोकतंत्र को “भीड़तंत्र” के हवाले नहीं किया जाना चाहिए। राज्य के राजस्व मंत्री ने कहा, “अगर कहीं चुनाव निर्विरोध हो रहे हैं, तो यह एक अच्छी परंपरा है। निर्विरोध जीतने वालों का एजेंडा विकास होता है।”

इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने के मामलों में भाजपा ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। बावनकुले ने कहा, “वे (मनसे) चाहें तो अदालत जा सकते हैं और न्याय मांग सकते हैं।

निर्विरोध चुनाव जीतना लोकतंत्र के लिए अच्छा है।” उन्होंने कहा कि अतीत में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। ठाकरे चचेरे भाइयों पर तंज कसते हुए बावनकुले ने कहा कि वे रैलियों में भीड़ तो जुटा सकते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वही भीड़ वोटों में तब्दील हो।

उन्होंने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के नेता सुजात आंबेडकर के उस बयान पर भी भाजपा का पक्ष स्पष्ट किया जिसमें दावा किया गया था कि कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे निकाय चुनावों के बाद सत्तारूढ़ दल में शामिल हो जाएंगी। बावनकुले ने कहा, “प्रणिती शिंदे ने अब तक किसी भी भाजपा नेता से संपर्क नहीं किया है। इस तरह के आरोप लगाकर किसी के राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।”

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