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Lokmat Parliamentary Awards: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, शिवसेना ने हमें महाराष्ट्र में दगा दिया

By संतोष ठाकुर | Updated: December 11, 2019 07:41 IST

पीयूष गोयल ने कहा, दक्षिण मुंबई में तो शिवसेना को कोई वोट तक नहीं देना चाहता था. उन्होंने घर-घर और गली-गली जाकर लोगों को समझाया कि उनका वोट परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाएगा.

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ठळक मुद्देराज्य में भाजपा की जीत हुई है और सरकार बनाने वाले तीनों दल की हार हुई है-गोयलअगर हम अकेले चुनाव लड़ते, तो वहां पर हम सरकार बनाने में सक्षम होते-वाणिज्य मंत्री

केंद्रीय वाणिज्य-रेल मंत्री पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-राकांपा गठबंधन को गैर तार्किक, असमान विचारधाराओं का मौकावादी गठजोड़ करार देते हुए कहा है कि इसकी परस्पर विरोधी विचारधारा का असर दिखना शुरू हो गया है. आखिर क्या वजह है कि पिछले 50 साल से स्वयं को हिंदूवादी पार्टी और अपने नेताओं को हिंदू हृदय सम्राट कहने वाली शिवसेना ने यह कहना बंद कर दिया है.

पीयूष गोयल ने दिल्ली में द्वितीय लोकमत कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि यह मौकापरस्ती का गठबंधन है. राज्य में भाजपा की जीत हुई है और सरकार बनाने वाले तीनों दल की हार हुई है. साथ ही यह भी जोड़ा कि शिवसेना ने भी जो सीटें जीती हैं, उसमें भाजपा का सहयोग रहा है.

उन्होंने कहा कि दक्षिण मुंबई में तो शिवसेना को कोई वोट तक नहीं देना चाहता था. उन्होंने घर-घर और गली-गली जाकर लोगों को समझाया कि उनका वोट परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाएगा. उसके बाद लोगों ने शिवसेना को वोट दिया. पीयूष गोयल ने इस अवसर पर एनआरसी, नागरिकता संशोधन बिल, आरसेप के साथ ही देश के आर्थिक भविष्य को लेकर भी विचार व्यक्त किए.

पीयूष गोयल ने कहा कि महाराष्ट्र की तुलना हरियाणा से करने वाले पहले यह समझें कि महाराष्ट्र में हमारा शिवसेना के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन हुआ था और इस युति को राज्य की जनता ने सरकार बनाने के लिए बहुमत दिया, जिसे शिवसेना ने झूठे दावों के साथ तोड़ा है, जबकि हरियाणा में जब किसी दल को बहुमत नहीं मिला, तो जेजेपी ने भाजपा के साथ आने और राजनीतिक अनिश्चितता से राज्य को बचाने के लिए सरकार बनाने का निर्णय किया.

ऐसा करते हुए उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईमानदारी और देश को आगे ले जाने का संकल्प भी देखा, जबकि महाराष्ट्र में ऐसा नहीं हुआ, वहां शिवसेना ने जनता के मत का अपमान किया, दोनों दल की युति को सरकार बनाने का बहुमत मिला. लेकिन, शिवसेना गलत दावों और बातों के साथ अपनी 35 साल पुरानी साथी से अलग हो गई. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हमारी जीत का प्रतिशत 70 प्रतिशत के करीब रहा. हमने 105 सीटों पर विजय हासिल की, जबकि शिवसेना ने 54 सीट जीतकर केवल 40% सफलता हासिल की.

इसमें भी अधिकतर जगह उसे हमारी वजह से जीत मिली. अगर हम अकेले चुनाव लड़ते, तो वहां पर हम सरकार बनाने में सक्षम होते. लेकिन, हमने गठबंधन धर्म निभाया. हमें क्या पता था कि हमें वफा के बदले ऐसी बेवफाई या दगाबाजी मिलेगी.

लोकमत कॉन्कलेव के विषय 'राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका' पर संबोधित हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दल की सोच सीमित वोट या क्षेत्र तक होती है. ऐसे में एक सशक्त और राष्ट्रीय दल की भूमिका जरूरी है.

उन्होंने क्षेत्रीय दलों के गठबंधन पर बनी चंद्रशेखर, देवगौड़ा और गुजराल सरकार का हवाला देते हुए कहा कि क्षेत्रीय दलों का कोई राष्ट्रीय उत्तरदायित्व नहीं होता है. ऐसे में वे अपने नफा-नुकसान के हिसाब से सरकार तक गिरा देते हैं. वहीं, जब वे एक राष्ट्रीय दल के घटक के रूप में सरकार का हिस्सा होते हैं, तो उनकी भूमिका अलग होती है.

ऐसे में क्षेत्रीय दल को राष्ट्रीय दलों के सैटेलाइट या सरकार में शामिल, पर सरकार गिराने में अक्षम दल के रूप में जरूर महत्व मिलना चाहिए. अगर वे सरकार चलाने के लिए जरूरी हो जाते हैं, तो यूपीए सरकार की तरह एक के बाद एक घोटाले सामने आते हैं.

पीयूष गोयल ने कहा कि जब कांग्रेस के ये घोटाले सामने आ रहे थे, तो एक सवाल के जवाब में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि यह गठबंधन सरकार की मजबूरियां हैं. इससे स्पष्ट समझा जा सकता है कि क्षेत्रीय दलों पर निर्भरता क्या होती है.

टॅग्स :लोकमत पार्लियामेंट्री अवार्ड्सपीयूष गोयलशिव सेनामहाराष्ट्रभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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