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मुश्किल में तेजस्वी यादव, लालू की अनुपस्थिती में राजद में विद्रोही नेताओं की बढ़ी तादाद, चुनाव पर असर की संभावना

By एस पी सिन्हा | Updated: April 22, 2019 04:43 IST

लोकसभा चुनाव 2019: राजद के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप ही हैं. शिवहर और जहानाबाद के राजद प्रत्याशी के खिलाफ तो उन्होंने खुला विद्रोह कर दिया है. दोनों जगह अपने उम्मीदवार खड़ा कर दिया है और उनके समर्थन में रोड शो भी कर रहे हैं.

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ठळक मुद्देराजद लोकसभा की 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राजद पहली बार इतने कम सीट पर चुनाव लड़ रही है. कई सीट पर तो राजद नेता ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ खम ठोक रहे हैं.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के जेल में रहने के चलते तेजस्वी यादव को काफी मुश्किलों का सामना करना पद रहा है. राजद के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर पूरा चुनाव प्रचार संभालना पड़ रहा है. हालात ये हो गये हैं कि अपने अब तक के राजनैतिक जीवन का सबसे अहम चुनाव प्रचार कर रहे तेजस्वी यादव पार्टी के विद्रोह को नहीं रोक पा रहे हैं. सबसे बड़े विद्रोही अभी उनके बड़े भाई तेजप्रताप ही बने हुए हैं. मौजूदा स्थिति में लालू प्रसाद यादव की कमी काफी खल रही है. 

यही नही राजद के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं. राजद लोकसभा की 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राजद पहली बार इतने कम सीट पर चुनाव लड़ रही है. कई सीट पर तो राजद नेता ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ खम ठोक रहे हैं. पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा ने जिस तरह अपने  नाराज लोगों को मनाया वैसी कोई पहल पार्टी में नहीं दिखी. पार्टी के कई बड़े नेता खुद चुनाव मैदान में है और जो चुनाव से बाहर हैं वह सक्रिय नहीं हैं. ऐसे में सारा प्रचार और सारी व्यवस्था 10 सर्कुलर रोड और तेजस्वी यादव पर आकर टिक गई है.

राजद के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप ही हैं. शिवहर और जहानाबाद के राजद प्रत्याशी के खिलाफ तो उन्होंने खुला विद्रोह कर दिया है. दोनों जगह अपने उम्मीदवार खड़ा कर दिया है और उनके समर्थन में रोड शो भी कर रहे हैं. हाजीपुर सीट पर भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया है. 

हालात ये हो गये हैं कि टिकट बंटवारे से नाराज पार्टी के कई प्रमुख नेता पार्टी छोड चुके हैं. इसमें पूर्व सांसद एमए फातमी, मंगनीलाल मंडल, पूर्व विधायक एसएस भास्कर, पूर्व विधान पार्षद रामबदन राय प्रमुख हैं. वहीं टिकट नहीं मिलने से नाराज सीतामढी के पूर्व सांसद सीताराम यादव भी चुप बैठ गये हैं. फातमी तो महागठबंदन के उम्मीदवार के खिलाफ बसपा के टिकट पर मधुबनी से मैदान में उतर गये हैं.

उनका विरोध दरभंगा सीट को भी प्रभावित कर सकती है. वे तीन बार यहां से सांसद रह चुके हैं. पार्टी ने 19 में से सिर्फ एक टिकट अति पिछडा को दिया है. इसको लेकर भी पार्टी के अति पिछड़े नेताओं में नाराजगी है. इधर पार्टी नेता दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि पार्टी के नाराज नेताओं को मनाने का भी कोई प्रयास नहीं हुआ है, न हो रहा है. इसका अच्छा संदेश नहीं जा रहा है. ऐसे में राजद के अंदर नाराजगी और बढ़ती हीं जा रही है, जिससे नुकसान की संभावना भी व्यक्त के जाने लगी है. 

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