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सुषमा स्वराज को राज्यसभा में लाने की संभावना, बीजेपी के इन नेताओं को भी मिल सकता है इनाम

By संतोष ठाकुर | Updated: May 24, 2019 08:25 IST

सुषमा ने इस बार लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा था. हालांकि उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ता की तरह कार्य करेंगी. उन्होंने कई सभाओं को संबोधित भी किया.

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ठळक मुद्देसुषमा स्वराज ने नहीं लड़ा था इस बार लोकसभा चुनाव, अब पार्टी भेजेगी राज्य सभाकैलाश विजयवर्गीय को भी पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए काम करने का मिल सकता है तोहफा बीजेपी पहली बार बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भी बड़ी उपिस्थति दर्ज कराने में सफल रही है

लोकसभा चुनाव-2019 में बंपर जीत के बाद भाजपा में कई ऐसे चेहरे हैं जिन्हें नई सरकार बनने के बाद पार्टी या सरकार में तोहफा मिल सकता है. ऐसे नेताओं में सबसे आगे कैलाश विजयवर्गीय, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, सुषमा स्वराज का नाम आगे है. चुनाव के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी पार्टी में राज्यसभा सीट देने पर चर्चा हो रही है.

सुषमा ने इस बार लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा था. हालांकि उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ता की तरह कार्य करेंगी. उन्होंने कई सभाओं को संबोधित भी किया. कैलाश विजयवर्गीय, धर्मेंद्र प्रधान और हेमंत विस्वा सरमा ऐसे चेहरे के तौर पर सामने आए हैं जिन्होंने पहली बार भाजपा को उत्तर की जगह पूर्व भारत की भी पार्टी के तौर पर स्थापित किया है. पहली बार पार्टी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर में भी बड़ी उपिस्थति दर्ज कराने में सफल रही है.

कैलाश विजयवर्गीय लंबे समय से पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दिन-रात पश्चिम बंगाल की एक-एक सीट पर जाकर ऐसे कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की जिनसे किसी राष्ट्रीय नेता ने आज तक बात तक नहीं की थी. यही नहीं, वह पिछले चार महीने से अधिक समय से अपना अधिकतर समय पश्चिम बंगाल में ही व्यतीत कर रहे थे.

तृणमूल कांग्रेस में सेंध लगाने, पार्टी का विस्तार करने, नए लोगों खासकर युवाओं तक जाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया. उन्हें मप्र में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोधी गुट का प्रमुख माना जाता है. ऐसे में चर्चा है कि अगर मप्र में सत्ता परिवर्तन हुआ तो उनकी लॉटरी लग सकती है. ऐसा नहीं होने पर उन्हें केंद्रीय सरकार में भी किसी तोहफा से नवाजा जा सकता है.

हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसी किसी संभावना से इनकार किया है. धर्मेंद्र प्रधान को पार्टी को ओडिशा में बड़े स्तर पर स्थापित करने, पीयूष गोयल को अकेले ही समस्त चुनाव का आर्थिक प्रबंधन देखने और चुनावी प्रचार की व्यूह रचना करने के लिए और बड़ी जिम्मेदारी देने की संभावना जाहिर की जा रही है.

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