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ममता ने कहा, मोदी के राज में भारत खतरे में हैं, आजादी या लोकतंत्र बेहाल, बाहर का रास्ता दिखाएं

By भाषा | Updated: May 8, 2019 17:07 IST

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘किसी को जोखिम लेना होगा। 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, अब हम सत्ता से फासीवादी मोदी को हटाने के लिए लड़ रहे हैं।’’

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ठळक मुद्देपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई की तुलना भारत छोड़ो आंदोलन से की।हमें महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद और स्वामी विवेकानंद जैसे नेताओं की जरूरत है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश में फासीवादी सरकार चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा के खिलाफ अपने अभियान की 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन से तुलना की।

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘किसी को जोखिम लेना होगा। 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, अब हम सत्ता से फासीवादी मोदी को हटाने के लिए लड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर मोदी फिर से जीते तो देश में आजादी या लोकतंत्र नहीं रहेगा। यही वक्त है कि हम मोदी और भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाएं। यही समय है कि इस लोकतांत्रिक (चुनावी) कवायद के दौरान इस सरकार को खत्म कर दें ।’’

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि लोग सार्वजनिक तौर पर अपनी राय व्यक्त करने से डर रहे हैं । उन्होंने कहा, ‘‘देश में आपातकाल जैसी स्थिति है। कोई भी खुलकर बोल नहीं सकता क्योंकि वे उनसे डरते हैं...इस तानाशाही और आतंक को रोकना होगा।’’

बनर्जी ने फिर जोर देकर कहा कि मोदी संकट के समय कभी पश्चिम बंगाल नहीं आए। उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल में आपको बड़ा रसगुल्ला (जीरो सीट) मिलेगा । ’’ मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मोदी ने झूठ बोला था कि वह कभी चायवाला थे। 

उन्होंने कहा, ‘‘चायवाला अब चौकीदार हो गया है । हमें झूठ बोलने वाला चौकीदार नहीं चाहिए ।’’ बनर्जी ने आरोप लगाया कि मोदी के राज में भारत खतरे में हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद और स्वामी विवेकानंद जैसे नेताओं की जरूरत है। हालांकि, वे (भाजपा) गांधीजी की नहीं, नाथूराम गोडसे की बात करते हैं। ’’ 

 

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