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लालू यादव ने साधा सीएम नीतीश कुमार पर निशाना, कहा- बिहार में महाजंगल राज, सत्ता के जालसाज बताएं कितनी हुई मौतें

By एस पी सिन्हा | Updated: May 18, 2021 21:06 IST

पिछले दिनों बिहार के बक्‍सर के पास गंगा नदी में बहती मिली लाशों को बिहार के अधिकारियों ने उत्‍तर प्रदेश का बताया था। इसे लेकर पटना हाईकोर्ट में एक लोकहित याचिका दायर की गई है।

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ठळक मुद्देलालू प्रसाद यादव ने ट्वीट कर नीतीश कुमार को निशाने पर लिया है। बिहार के बक्सर के पास गंगा नदी में बहती मिली लाशों पर लालू यादव ने सवाल खड़े किए हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बिहार की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।

बिहार में कोरोना संक्रमण के कहर से जारी मौतों पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर से मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है। उन्‍होंने कहा है कि सत्‍ता में बैठे जालसाज मौत को भी छुपा रहे हैं। इस संबंध में किए गए अपने ट्वीट में उन्‍होंने पटना हाईकोर्ट में राज्‍य के मुख्‍य सचिव व पटना के प्रमंडलीय आयुक्‍त के विरोधाभाषी बयानों का हवाला दिया है।

राजद प्रमुख ने अपने ट्वीट में बिहार के महाजंगलराज की कहानी बताने की बात करते हुए लिखा है कि सत्ता में बैठे जालसाज मौत के आंकडे छिपा रहे हैं। बक्‍सर में हुई मौतों की बाबत जब पटना हाईकोर्ट ने पूछा तो मुख्य सचिव ने छह बताया तो आयुक्‍त ने 789 का आंकडा दिया। अब दोनों में सच कौन बोल रहा है? बक्सर जिला में 11 सौ से अधिक गांव हैं। पता कर लीजिए कि प्रत्येक गांव में औसतन कितनी मौतें हुईं हैं? 

वहीं लालू के हमले के बाद राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने एनडीए नेताओं से कहा है कि कम से कम कोरोना महामारी के इस विपदा में भी वे लालू-तेजस्वी के दायरे से बाहर निकलें। उन्होंने कहा कि लगभग सोलह वर्षों से बिहार के सत्ता पर काबिज एनडीए के नेता आज भी लालू-तेजस्वी के दायरे में हीं अपने को उलझाये हुए हैं और इसी का परिणाम है कि बिहार आज चौहत्तर साल पीछे चला गया है। 

बिहार को पहले भी हैजा, चेचक और प्लेग जैसे महामारीयों से गुजरना पडा था। साधन और सुविधा की कमी के बावजूद ऐसी बदत्तर स्थिति कभी नहीं हुई थी कि शमशान और कब्रिस्तान में भी लोगों को घंटों इंतजार करना पडे और बगैर संस्कार के सैकडों शव गंगा नदी में तैरते हुए मिले। राजद प्रवक्ता ने कहा कि आज बिहार की जो इतनी वीभत्स स्थिति हुई है, इसके लिए पूर्ण रूप से लगभग सोलह वर्षों से बिहार की सत्ता में बैठे भाजपा और जदयू जिम्मेवार हैं। 

चूंकि इनके नेता आजतक कभी लालू-तेजस्वी के दायरे से बाहर निकल हीं नहीं पाये। वे सोलह वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी 2005 के पहले वाली मानसिकता में हीं उलझे रहे। बिहार की जनता के प्रति अपनी जिम्मेवारी को कभी समझने का प्रयास भी नहीं किया। आज भी टीकाकरण में पिछडने के लिए सांसद सुशील मोदी लालू प्रसाद और राबडी देवी का माला जप रहे हैं।

स्थिति यह है कि राज्य में वैक्सीन उपलब्ध है नहीं। टीकाकरण केन्द्रों पर से लोग लौट रहे हैं। स्वास्थ्य केन्द्रों पर वैक्सीन नहीं है, के बोर्ड लगा दिये गये हैं। सुशील मोदी बंद कमरे में बैठ कर बेशर्मी के साथ ट्वीट पर ट्वीट कर रहे हैं। केन्द्र की सरकार से बिहार के लिए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन मांगने की हिम्मत नहीं हो रही है। सुशील कुमार मोदी जैसे लोग आज हंसी के पात्र बन चुके हैं। 

सोमवार को बिहार सरकार की ओर से विरोधाभासी जवाब दिए गए। राज्‍य के मुख्य सचिव ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान एक से 13 मई के बीच बक्सर में केवल छह मौतें हुईं हैं। दूसरी ओर पटना के प्रमंडलीय आयुक्त ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया कि पांच मई से 14 मई के बीच बक्सर केवल एक घाट पर 789 लाशें जलाईं गईं। दोनों अधिकारियों के जवाब में विरोधाभाष को कोर्ट ने पकडा तथा 19 मई तक स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया। अब इस मामले में सरकार बुधवार तक जवाब देगी।

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