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अगस्त माह में हाथियों द्वारा मानव मृत्यु के सबसे अधिक मामले; झाड़ीदार वनस्पति और घने जंगल मानव-पशु संघर्ष का कारण

By अनुभा जैन | Updated: September 11, 2023 18:31 IST

कर्नाटक में मानव-पशु संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण बढ़ी हुई जंगली वनस्पति है जो हाथियों को घूमने के लिए आश्रय प्रदान करती है और मनुष्यों के लिए उन्हें दूर से देखना चुनौतीपूर्ण बना देती है।

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ठळक मुद्दे2018 से हाथियों के हमले से हुई 148 मौतों में से 26 मौतें अगस्त महीने में18 मौतें जुलाई में और 17 मौतें मई में हुईंकर्नाटक में मानव-पशु संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण बढ़ी हुई जंगली वनस्पति है

बेंगलुरु: 2018 से हाथियों के हमले से हुई 148 मौतों में से 26 मौतें अगस्त महीने में, 18 मौतें जुलाई में और 17 मौतें मई में हुईं। इन पांच वर्षों में अगस्त महीने में मानव मृत्यु के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा कि 2018 के बाद से हर साल हाथियों के हमलों के कारण 26 लोगों की मौत हुई है, जबकि कुल मिलाकर वन्यजीवों के हमलों की संख्या लगभग 50 है। वन विभाग के मुताबिक, हालांकि अन्य महीनों में भी हमले हुए हैं लेकिन हताहतों की संख्या न्यूनतम रही है।

कर्नाटक में मानव-पशु संघर्ष की बढ़ती घटनाओं का मुख्य कारण बढ़ी हुई जंगली वनस्पति है जो हाथियों को घूमने के लिए आश्रय प्रदान करती है और मनुष्यों के लिए उन्हें दूर से देखना चुनौतीपूर्ण बना देती है। अधिकतर ये हमले तब सामने आए हैं जब लोग अपने खेत की ओर या अन्य काम के लिए निकले थे।

वन अधिकारी ने जानकारी देते हुये बताया कि जंबो भोजन की तलाश में मानव आवास की ओर आते हैं। मानसून के मौसम में हाथी स्वतंत्र रूप से घूमते हैं और इंसानों के लिए उन्हें देखना मुश्किल हो जाता है। घने वृक्षों वाले हासन और कोडागु जिलों में जंगल और निजी संपत्ति के बीच अंतर को चिह्नित करना मुश्किल है।

इन हमलों को कम करने के लिए, और इन हाथियों को बचाने और पुनर्वास के लिए सरकार जंबो कैंप स्थापित कर रही है। हासन जिले में, हाथियों को जंगलों में रहने के लिए, किसान हाथी कॉरिडोर या गलियारे स्थापित करने के लिए अपनी जमीनें सौंपने के लिये आगे आए हैं। 

वन सीमाओं पर खेती करने वाले किसान 3 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि छोड़ने को तैयार हैं जिसे वन क्षेत्र में जोड़ा जा सकता है, बावजूद उन्हें उनकी भूमि का बाजार मूल्य मिले। वन मंत्री ने बताया कि चर्चा और उपलब्ध वित्तीय अनुदान के बाद भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है और वन क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।

टॅग्स :कर्नाटकबेंगलुरुForest Department
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