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झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई पर कहा, 'भाजपा लोगों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रही है'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: October 21, 2022 20:38 IST

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भाजपा शासित राज्यों एमपी और यूपी द्वारा हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई करवाए जाने की पहल को फरेब की संज्ञा दी है।

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ठळक मुद्देस्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भाजपा शासित राज्यों द्वारा हिंदी में मेडिकल की शिक्षा को फरेब बतायाझारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भाजपा के लोग हर चीज को राष्ट्रवाद से जोड़ने के आदि हो गये हैंभाजपा के मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश शासित राज्य हिंदी में मेडिकल शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं

रांची:झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार के बाद अब यूपी सरकार के द्वारा हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई को बढ़ावा दिये जाने पर जमकर हमला किया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भाजपा शासित राज्यों की इस शानदार पहल को फरेब की संज्ञा देते हुए कहा कि भाजपा के लोग हर चीज को राष्ट्रवाद से जोड़ने के आदि हो गये हैं। इन्हें हर बात में राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को उकसाने का काम करने में बहुत आनंद आता है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा, "हर चीज को राष्ट्रवाद, हिंदी ये सब करके वे (भाजपा) लोगों की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। इतना ही बढ़िया उनका इरादा है तो हमारे 24 ज़िलों में मेडिकल कॉलेज खोल दें।"

बीते कुछ समय से राज्य में चल रही राजनैतिक रस्साकशी के बीच मंत्री बन्ना गुप्ता का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तरह झारखंड भी हिंदीभाषी राज्य है और मध्य प्रदेश-यूपी के उठाये इस कदम की झारखंड भाजपा ने तारिफ करते हुए अपने सूबे में भी हिंदी माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई की मांग की है।

मध्य प्रदेश सरकार की पहल पर बीते 16 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी में एमबीबीएस की किताबों को किया। इसके लिए मध्यप्रदेश शासन ने बेहतरीन पहल की और सूबे के 97 डॉक्टरों की एक टीम ने चार महीने मेहनत करते हुए एमबीबीएस की अंग्रेजी की किताबों का हिन्दी में अनुवाद किया था।

इसके बाद 21 अक्टूबर को यूपी की योगी सरकार ने भी हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई के लिए गंभीर कदम उठाने का निर्देश चिकित्सा शिक्षा विभाग को जारी किया था। जिसके बाद विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जिसने हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने के लिए अपनी सिफारिशें विभाग को सौंपी है।

मालूम हो कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की इस पहल के साथ भारत भी जल्द ही यूक्रेन, रूस, जापान, चीन, किर्गिजस्तान और फिलीपींस जैसे देशों की तरह मेडिकल की पढ़ाई अपने मातृभाषा में कराने वाला देश की कतार में शामिल हो जाएगा। 

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