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सच में चीन से युद्ध होने वाला है? भंडारण का आदेश संकेत देता है, अधिकारी बोले- नेशनल हाइवे की हालत के मद्देनजर फैसला

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: June 29, 2020 19:05 IST

प्रशासन ने इसके पीछे अमरनाथ यात्रा और मानसून की बारिश से पहले की तैयारियों का हवाला दिया है, लेकिन इन आदेशों ने लोगों के कान खड़े कर दिए हैं। दरअसल, राजमार्ग पर भूस्खलन के कारण हर बार परेशानी होती है।

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ठळक मुद्देसभी तेल कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि कश्मीर में कम से कम दो महीने के लिए एलपीजी गैस की कोई कमी न हो।आमतौर पर ऐसे आदेश सर्दी शुरू होने से पहले जारी होते हैं, जब बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो जाता है।स्कूल शिक्षा विभाग से मिडिल स्कूल, हायर सेकंडरी स्कूल और आइआइटी की इमारतों को प्रशासन को सौंपने के लिए कहा गया है।

जम्मूः क्या सच में चीन के साथ लद्दाख सेक्टर में युद्ध छिड़ने वाला है? कश्मीर में खाना पकाने की गैस और अनाज के दो माह के भंडारण के आदेशों के अतिरिक्त स्कूलों को सुरक्षाबलों के लिए खाली करने के आदेश यही संकेत देते हैं।

पर अब अधिकारी कहते हैं कि ऐसे निर्देश जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे की दशा को देखते हुए निकाले गए थे। हालांकि एक अधिकारी के बकौल, अलगाववादी नेता सईद अली शाह गिलानी की नाजुक दशा को देखते हुए कश्मीर के हालात खराब होने की शंका के चलते ऐसा करने का आदेश जारी किया गया था।

इन निर्देशों के प्रति अब प्रशासन ने इसके पीछे अमरनाथ यात्रा और मानसून की बारिश से पहले की तैयारियों का हवाला दिया है, लेकिन इन आदेशों ने लोगों के कान खड़े कर दिए हैं। दरअसल, राजमार्ग पर भूस्खलन के कारण हर बार परेशानी होती है।

कश्मीर में कम से कम दो महीने के लिए एलपीजी गैस की कोई कमी न हो

सलाहकार ने बैठक में निर्देश दिए थे कि सभी तेल कंपनियां यह सुनिश्चित करें कि कश्मीर में कम से कम दो महीने के लिए एलपीजी गैस की कोई कमी न हो। कश्मीर में गर्मी में इस प्रकार का आदेश पहली बार जारी हुआ है। आमतौर पर ऐसे आदेश सर्दी शुरू होने से पहले जारी होते हैं, जब बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो जाता है।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सचिव सिमरनजीत सिंह का कहना है कि मानसून की बरसात में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो जाता है, जिससे आवश्यक सामान पहुंचाने में परेशानी होती है। एक महीने का भंडार उपलब्ध है। हमने तेल कंपनियों को दो और महीने का भंडार रखने के लिए ही कहा है। इससे कुछ अधिक नहीं।

अमरनाथ की यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों के जवानों को ठहराया जाएगा

दूसरा आदेश गांदरबल के एसएसपी खलील पोसवाल का है। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मिडिल स्कूल, हायर सेकंडरी स्कूल और आइआइटी की इमारतों को प्रशासन को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके लिए हवाला यह दिया गया है कि अमरनाथ की यात्रा के दौरान सुरक्षा बलों के जवानों को ठहराया जाएगा।

वहीं, यह बात देखने वाली है कि अभी तक अमरनाथ यात्रा को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। यदि यात्रा होती है तो इसकी अवधि बहुत कम होगी। इसीलिए एसएसपी का यह आदेश अहम है और कई मायने रखता है। वैसे कश्मीर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि एलपीजी भंडारण को लेकर कुछ लोग अफवाह फैला रहे हैं।

जो आदेश जारी किया गया वह मानसून के दौरान जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से उत्पन्न होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए है। प्रयास है कि इन परिस्थितियों में सभी आवश्यक वस्तुओं का संकट न पैदा हो। हालांकि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार व्यवधानों के मद्देनजर सर्दियों में इस तरह की व्यवस्था आम बात है लेकिन गर्मियों के मौसम में इस तरह बड़े स्तर पर भंडारण की बात पहले नहीं हुई।

यह बात अलग है कि गांदरबल के एसएसपी खलील पोसवाल ने इस मामले को चीन के साथ युद्ध से जोड़ने को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि अमरनाथ यात्रा को लेकर हर साल रुटीन में एक एक्सरसाइज होती है।

हर साल इस जिले के स्कूलों में केंद्रीय सुरक्षा बल के जवानों को ठहराया जाता है। इसके बावजूद इन दो आदेशों से कश्मीर में राजनीति गरमाने के साथ-साथ लोगों में भी असमंजस है। लोगों को यह लगने लगा है कि कहीं सरकार युद्ध की तैयारियां तो नहीं कर रही है।

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