लाइव न्यूज़ :

काबुल विश्वविद्यालय में फंसे भारतीय शिक्षकों ने कहा, उम्मीद है सरकार हमें जल्द निकालेगी

By भाषा | Updated: August 18, 2021 19:21 IST

Open in App

राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से गोलियों की आवाज नहीं सुनाई दे रही है लेकिन बीतते समय के साथ संकट गहरा रहा है। यह कहना है युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में फंसे चार भारतीय शिक्षकों का जिन्होंने तुरंत उन्हें वहां से निकालने की अपील की है ताकि वे अपने परिवारों के पास लौट सके। चारों भारतीय शिक्षक काबुल स्थित बख्तर विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं जिस पर तीन दिन पहले तालिबान ने कब्जा कर लिया है। मोहम्मद आसिफ शाह ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘ हमने भारत में हर संभव मंच पर संपर्क किया। हम उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार यहां से हमारी तत्काल निकासी सुनिश्चित करने के लिए कुछ न कुछ करेगी। हमने पिछले दो दिन से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर कदम नहीं रखा है और हर वक्त बाहर हंगामा होता है, मेरा दिल घबरा रहा है।’’ शाह कश्मीर के रहने वाले हैं और काबुल के विश्विवद्यालय में गत चार साल से अर्थशास्त्र पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें और उनके सहयोगियों को डर है कि मौजूदा माहौल में कुछ भी अनहोनी हो सकती है। शाह ने कहा, ‘ मेरी योजना सोमवार को लौटने की थी। यहां तक कि मैने टिकट भी बुक करा लिया था लेकिन स्थिति तेजी से बदली। मुझे हवाई अड्डे पहुंचने में घटों लग गये और ऐसा लगा कि पूरा काबुल हवाई अड्डे पर जमा हो गया है। उड़ान रद्द कर दी गई और मेरे पास विश्वविद्यालय हॉस्टल लौटने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था।’’ वह दो महीने पहले ही सरकार द्वारा ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने के फैसले के बाद अफगानिस्तान लौटे थे। विश्वविद्यालय में मार्केटिंग विषय पढ़ाने वाले बिहार के रहने वाले सैयद आबिद हुसैन ने कहा कि हालात को देखते हुए वह अबतक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस अनिश्चितता में नहीं रहना चाहते हैं। हम दूतावास और विदेश मंत्रालय के संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी अबतक सुनी नहीं गई है लेकिन मुझे भरोसा है कि सरकार हमें काबुल से सुरक्षित निकालने के लिए कोशिश कर रही है।’’ विश्वविद्यालय में ही पत्नी के साथ रह रहे कश्मीर के आदिल रसूल ने कहा, ‘‘हम प्रार्थना कर रहे हैं कि स्थिति और खराब नहीं हो तथा हम सुरक्षित घर लौट सके।’’ वर्ष 2017 से ही विश्वविद्यालय में प्रबंधन विषय पढ़ा रहे रसूल ने कहा कि इस समय सभी विश्वविद्यालय परिसर में हैं और भारतीय दूतावास या सरकार से सकारात्मक पहल का इंतजार कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान पढ़ा रहे झारखंड के अफरोज आलम ने कहा कि अबतक यहां कोई खून खराबा नहीं हुआ है लेकिन भय का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘अबतक बाहर कोई खूनखराबा नहीं हुआ है। हमने शहर में गोलियों की भी आवाज नहीं सुनी है लेकिन हमें भय है कि कहीं यह शांति क्षणिक न हो। परिसर बड़ा है, इसलिए हम जरूरतों के लिए बाहर नहीं जाते। मैं बस यहां से सुरक्षित निकलने की उम्मीद कर रहा हूं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टडंडा और रॉड से हमला कर पत्नी फूल कुमारी दास, 3 बच्चे ह्रदय दास, संध्या दास और सोन दास को मार डाला, चंदनपट्टी गांव से दिल दहला देने वाली घटना

भारतशिविर में कुल 67 शिकायत, 30 दिन में करें समाधान नहीं तो 31वें दिन निलंबित?, रेफर नीति अपनाई तो सिविल सर्जन और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई?, सम्राट चौधरी ने दी चेतावनी

भारतबाप नीतीश कुमार-बेटे निशांत को डॉक्टर की जरूरत, स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया?, पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन का फूटा गुस्सा, वीडियो

भारततख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारे में माथा टेकने पटना पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केन्द्र सरकार और भाजपा पर बोला तीखा हमला

भारतबिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की उद्योगपतियों को बिहार वापस आने और प्रदेश में ही उद्योग लगाने की अपील

भारत अधिक खबरें

भारतविकास प्रक्र‍िया में जनजातीय समाज को शामिल करने प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाई नीतियां: मंत्री डॉ. शाह

भारतक्या बीजेपी में शामिल होंगे रेवंत रेड्डी? तेलंगाना सीएम को लेकर निज़ामाबाद के सांसद धर्मपुरी के बयान ने मचाई सनसनीखेज

भारत2020 Delhi riots case: अदालत ने बीमार माँ की देखभाल के लिए उमर खालिद को अंतरिम ज़मानत देने से किया इनकार

भारतइंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा सहित मप्र के पांच कलेक्टर फेम इंडिया-एशिया पोस्ट की सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026 सूची में शामिल

भारतFalta Assembly Constituency: 21 मई को फाल्टा में पुनर्मतदान, तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने उम्मीदवारी वापस ली, वीडियो