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सीएम योगी की गैरमौजूदगी में विधायकों ने समझी AI की बारीकियां! यूपी विधानसभा में पहली बार हुआ ऐसा

By राजेंद्र कुमार | Updated: August 10, 2025 20:19 IST

एआई की इस खूबी के चलते उत्तर प्रदेश विधानसभा में रविवार को विधायकों को एआई के बारे में प्रशिक्षित करने का एक संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया.

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लखनऊ: पूरी दुनिया में इस वक्त एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की धूम मची है. एआई एक ऐसी तकनीक है जो कंप्यूटर और मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, समझने और काम करने की क्षमता देती है. जिसके चलते दुनिया भर में लोग एआई की बारीकियों को सीखने के कोर्स चला रहे हैं, ताकि उसके जरिए डॉक्टर, वकील, इंजीनियर,शिक्षक,कारोबारी सहित समाज के हर क्षेत्र में कार्यरत लोग एआई के जरिए अपने काम को आसान बनाना का तरीका सीख सकें. 

एआई की इस खूबी के चलते उत्तर प्रदेश विधानसभा में रविवार को विधायकों को एआई के बारे में प्रशिक्षित करने का एक संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया. प्रशिक्षण सत्र में सीएम योगी ने हिस्सा नहीं लिया, लेकिन सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक बड़ी संख्या में आए और इन सभी ने आईआईटी प्रोफेशनल से एआई की बारीकियां जानी. 

विधायकों ने उठाया डाटा के फेक होने का मुद्दा : 

इस प्रशिक्षण सत्र में विधायकों को आईआईटी प्रोफेशनल ने एआई के जरिए कैसे कानूनी शोध करें, यह बताया. इसके साथ ही दस्तावेज़ कैसे जांचे और नीतियों का अध्ययन करने में मदद करने वाले स्मार्ट उपकरणों का एआई के जरिए कैसे उपयोग करें, यह भी बताया गया. इससे अलावा कैसे एआई के जरिए विधायक नए विधेयक लिखने और कानूनी समस्याओं को पहचाने तथा और प्रस्तावित कानूनों की तुलना अन्य राज्यों और देशों के समान कानूनों के साथ कैसे करें यह भी सिखाया गया. 

इस प्रशिक्षण सत्र में विधायकों ने डाटा की उपलब्धता को लेकर कई सवाल किए और डाटा के फेक (गलत) होने का मुद्दा भी उठाया. कहा कि जब डाटा ही गलत होगा तो कैसे एआई सही जानकारी देगा? तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सूबे की हर विधानसभा क्षेत्र के विकास का पूरा डाटा जल्दी ही तैयार होगा और उसके आधार पर विधायक सरकार से सवाल भी कर सकेंगे. 

सतीश महाना का कहना था कि विधानसभा में यह पहला मौका होगा जब सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक आईआईटी के प्रोफेशनल से यह सीख रहे हैं कि कैसे वह अपने कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल पर एआई का उपयोग करें. कैसे इस तकनीक के जरिए अपने भाषण लिखे, लोगों के पत्रों का जवाब दें और अपने विधानसभा क्षेत्र का रिकॉर्ड तैयार करें. 

यहीं नहीं सदन में दिए गए अपने भाषण की क्लिप भी कैसे अपने मोबाइल और लैपटॉप में सुरक्षित रखें ताकि उसे समय पर आसानी से प्राप्त किया जा सके. उन्होंने कहा यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा क्योंकि बदल रहे समाज में हर विधायक को एआई की बारीकियां जाना भी जरूरी हो गया है. 

टॅग्स :आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसउत्तर प्रदेश समाचारUP Vidhan Sabha Monsoon Session
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