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वैश्विक भूख सूचकांक: जर्मन एनजीओ ने सरकार के दावों को खारिज किया, कहा- जनमत सर्वेक्षण पर आधारित नहीं सूचकांक

By विशाल कुमार | Updated: October 17, 2021 08:01 IST

इस साल वैश्विक भूख सूचकांक का सह-प्रकाशन करने वाले जर्मन एनजीओ ने शनिवार को सरकार के इस आरोप को खारिज कर दिया कि भारत की 16 सबसे खराब देशों में रैंकिंग एक जनमत सर्वेक्षण पर आधारित थी. इसने यह भी बताया कि सरकार ने 'अल्पपोषण' को 'कुपोषण' मानकर भी गलती की.

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ठळक मुद्देग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 में भारत को 116 देशों में से 101 रैंकिंग मिली है.जीएचआई जारी होने के बाद सरकार ने आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया था.जीएचआई के सह-प्रकाशक ने शनिवार को सरकार के आरोपों को खारिज कर दिया.

नई दिल्ली: इस साल वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) का सह-प्रकाशन करने वाली जर्मन गैर-लाभकारी संस्था (एनजीओ) वेल्टहंगरलाइफ (डब्ल्यूएचएच) ने शनिवार को सरकार के इस आरोप को खारिज कर दिया कि भारत की 16 सबसे खराब देशों में रैंकिंग एक जनमत सर्वेक्षण पर आधारित थी. इसने यह भी बताया कि सरकार ने 'अल्पपोषण' को 'कुपोषण' मानकर भी गलती की.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 116 देशों में से 101 रैंकिंग देने वाले जीएचआई के गुरुवार को जारी होने के बाद सरकार ने आश्चर्य जताया था और उसके दो प्रकाशकों द्वारा अवैज्ञानिक तरीके इस्तेमाल करने पर सवाल उठाया था.

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि एक सर्वेक्षण पर भरोसा करने के बजाय, सूचकांक को 'अल्पपोषण' संकेतक की गणना के लिए वजन और ऊंचाई के माप का उपयोग करना चाहिए था.

दरअसल, जीएचआई रैंकिंग की गणना करने के लिए चार में से एक तरीके के रूप में चार सवालों का एक जनमत सर्वेक्षण किया गया था.

सरकार ने 'अल्पपोषण' संकेतक को खारिज कर दिया, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा संकेतक था, जहां भारत का प्रदर्शन पिछले वर्षों की तुलना में खराब हुआ था.

2017-2019 और 2018-2020 के बीच कुपोषण का प्रसार 14 फीसदी से बढ़कर 15.3 फीसदी हो गया.

जीएचआई की सलाहकार मिरियम वीमर्स ने कहा कि जीएचआई में जनमत संकेतक का नहीं बल्कि हर देश द्वारा उपलब्ध कराए गए अल्पपोषण पर आधारित आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है.

सरकार का यह कहना भी गलत था कि चार पड़ोसी देशों - अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका - के अल्पपोषण संकेतकों पर प्रदर्शन में सुधार हुआ है, क्योंकि चार में तीन में बढ़ोतरी हुई है.

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने जीएचआई को खारिज किया है. मार्च में महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद को बताया था कि जीएचआई के आंकड़े बेकार हैं.

बता दें कि, भारत 116 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) 2021 में 101वें स्थान पर पहुंच गया है, जो 2020 में 94वें स्थान पर था. भारत अब अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे है.

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