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आंध्रप्रदेश : पूरा परिवार कोरोना के डर से 15 महीनों से घर में था बंद, तबीयत खराब होने पर पुलिस ने निकाला बाहर, जानें पूरा मामला

By दीप्ती कुमारी | Updated: July 22, 2021 15:28 IST

आंध्र प्रदेश का एक परिवार कोरोना से इतनी दहशत में था कि पूरे परिवार ने खुद को 15 महीने से एक तंबू में बंद कर रखा था, जहां उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई थी । तब पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला

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ठळक मुद्देकोरोना के डर से परिवार ने खुद को घर में किया कैद, तबीयत बिगड़ी 15 महीने से परिवार एक छोटे तंबू के अंदर ही रह रहा था पड़ोस में कोरोना से हुई मौत के बाद परिवार में दहशत का माहौल था

हैदराबाद : आंध्र प्रदेश पुलिस ने बुधवार एक ऐसा परिवार को बचाया,जो कोरोना के डर से पिछले 15 महीनों से एक टैंट हाउस में बंद था । परिवार के बीच कोरोना का ऐसा खौफ था कि उन्होंने खुद को घर में ही कैद कर लिया था । 

कदली गांव के सरपंच चोपला गुरूनाथ ने बताया कि रूथम्मा (50 वर्ष), कंथमणि (32) और रानी (30 वर्ष) ने स्वयं को लगभग 15 महीने से घर में बंद कर रखा था, जब उनके पड़ोसी की कोरोना से मौत हो गई थी । इस घटना से पूरा परिवरा दहशत में था । 

किसी के लिए दरवाजा नहीं खोलता था परिवार 

यह मामला तब सामने आया जब एक गांव का स्वयंसेवक एक सरकारी योजना के तहत उनके आवास की अनुमति देने के लिए अंगूठे का निशान लेने गया था लेकिन उन्होंने उसके लिए भी दरवाजा नहीं खोला । तब स्वयंसेवक ने मामले की जानकारी सरपंच व अन्य लोगों को दी।

एएनआई से बात करते हुए गुरुनाथ ने कहा कि चट्टुगल्ला बेनी,उनकी पत्नी और दो बच्चों का परिवार यहां रह रहा है । वह कोरोना से डरते थे तो उन्होंने लगभग 15 महीने तक खुद को घर में बंद कर लिया । कोई भी  स्वयंसेवक या आशा कार्यकर्ता जो भी उनके घर जाता था । वह उसे कोई जवाब नहीं दे रहे थे । हाल ही में उनके कुछ रिश्तेदारों ने बताया कि 3 लोगों ने खुद को उस घर में बंद कर लिया है और उनकी तबीयत खराब है।

उन्होंने कहा कि मामला जानने के बाद हम उसी स्थान पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया । राजोले उपनिरीक्षक कृष्णमाचारी और उनकी टीम ने आकर उन्हें बचाया जब वे बाहर आए तो उनकी हालत बहुत खराब थी । उन्होंने कई दिनों से स्नान भी नहीं किया था । हमने तुरंत उन्हें सरकारी अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज चल रहा है । सरपंच के मुताबिक अगर दो-तीन दिन और ऐसे ही चलता तो परिवार की मौत हो जाती।

उन्होंने कहा कि उनका मामला तब सामने आया जब मेरे गांव के स्वयंसेवक उनके अंगूठे का निशान लेने के लिए उनके घर गए क्योंकि उन्हें एक आवास स्थल आवंटित किया गया था । जब उन्होंने उन्हें बुलाया तो उन्होंने यह कह कर बाहर आने से इंकार कर दिया कि अगर बाहर आएंगे तो भी मर जाएंगे । बाद में स्वयंसेवक ने हमें मामले की सूचना दी थी और हम जगह पर पहुंचे । परिवार एक छोटे तंबू के अंदर रह रहा था और इस छोटे से तंबू के भीतर ही अपना सारा काम करते थे ।  

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