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संरक्षकों को सशक्त बनाना: वंतारा अपने कर्मचारियों की भलाई के लिए कैसे काम करता

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 17, 2025 22:44 IST

3,000 एकड़ में फैले इस केंद्र में 2,000 से अधिक प्रजातियों के 1,50,000 से ज्यादा जानवर रहते हैं, जिनमें हाथी, बड़ी बिल्लियाँ, शाकाहारी जानवर, सरीसृप और पक्षी शामिल हैं।

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ठळक मुद्देजानवरों और इंसानों, दोनों की भलाई को समान महत्व दिया जाता है। कई जानवर शोषण के शिकार थे या मृत्यु के कगार पर पाए गए थे।

वंताराः अनंत अंबानी द्वारा रिलायंस फाउंडेशन के तहत जमनगर में स्थापित एक अग्रणी पशु बचाव, संरक्षण और देखभाल केंद्र है। यह सिर्फ हजारों संकटग्रस्त जानवरों को बचाने के लिए ही नहीं बल्कि उन लोगों को भी महत्व देता है जो इस मिशन को संभव बनाते हैं। लगभग 3,000 कर्मियों के साथ, जिनमें पशु पालन, वन्य जीवन संरक्षण और पशु चिकित्सा के विश्व-प्रसिद्ध विशेषज्ञ शामिल हैं, वंतारा ने ऐसा दुर्लभ वातावरण बनाया है जहाँ जानवरों और इंसानों, दोनों की भलाई को समान महत्व दिया जाता है। 

3,000 एकड़ में फैले इस केंद्र में 2,000 से अधिक प्रजातियों के 1,50,000 से ज्यादा जानवर रहते हैं, जिनमें हाथी, बड़ी बिल्लियाँ, शाकाहारी जानवर, सरीसृप और पक्षी शामिल हैं। इनमें से कई जानवर शोषण के शिकार थे या मृत्यु के कगार पर पाए गए थे। हर जानवर के लिए विशेष आवास, गतिविधियों का कार्यक्रम, चौबीसों घंटे चिकित्सकीय देखभाल और प्रजाति के अनुसार भोजन सुनिश्चित किया जाता है,

ताकि उनकी लंबी उम्र और स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके। बचाए गए वन्य जीवों की देखभाल चुनौतीपूर्ण और अक्सर अप्रत्याशित होती है। इसे समझते हुए, वंतारा ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और प्रशिक्षण के लिए व्यवस्थित और व्यापक व्यवस्था बनाई है। स्टाफ को सुरक्षा उपकरण प्रदान किए जाते हैं, उन्हें जानवरों को संभालने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है।

इन उपायों से यह सुनिश्चित होता है कि पशु चिकित्सक, हाथी प्रशिक्षक, जानवर संभालने वाले और अन्य सहयोगी कर्मचारी सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ काम कर सकें। वंतारा में यह माना जाता है कि कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई ही जानवरों की सुरक्षा और देखभाल की नींव है। यह तरीका अनंत अंबानी के बड़े सोच को दिखाता है, जिसमें सहानुभूति, विज्ञान और जिम्मेदारी के आधार पर पशु संरक्षण की नींव रखी गई है। विश्व के सबसे बड़े हाथी देखभाल अस्पताल में से एक स्थापित करना या प्रजाति-विशेष आवास तैयार करना, जिनसे जानवरों का प्राकृतिक व्यवहार बढ़ता है,

यह सभी इस बात को दिखाते हैं कि देखभाल ही संरक्षण की नींव है। वंतारा अपने कर्मचारियों के प्रति भी यही तरीका अपनाकर ऐसा माहौल बना रहा है, जहाँ जानवरों के साथ-साथ लोगों के प्रति भी सहानुभूति और सम्मान गहराई से निभाई जाती है।

टॅग्स :गुजरातमुकेश अंबानीसुप्रीम कोर्ट
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