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DRDO ने नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण किया, हवा में ही नष्ट हो जाएगा दुश्मन का हथियार

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: January 12, 2024 16:01 IST

आकाश-एनजी प्रणाली एक अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली है जो तेज गति से आती दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन, या लड़ाकू विमान को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है।

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ठळक मुद्देDRDO ने नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण कियाअपने मानवरहित हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्क भेद दियादुश्मन की मिसाइल, ड्रोन, या लड़ाकू विमान को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर से नई पीढ़ी की आकाश (AKASH-NG) मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। ये परीक्षण  12 जनवरी, शुक्रवार की सुबह 10.30 बजे किया गया। इस परीक्षण की खास बात रही कि मिसाइल ने बेहद कम ऊंचाई पर उड़ रहे अपने मानवरहित हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्क भेद दिया। 

आकाश (AKASH-NG) मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद अधिकारियों ने कहा,  "इससे स्वदेशी रूप से डेवलप रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर, लॉन्चर, मल्टी-फंक्शन रडार व कमांड, कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ मिसाइल से लैस कंप्लीट वेपन सिस्टम के कामकाज को मान्यता मिली है।"

मिसाइल के प्रदर्शन का डेटा आईटीआर, चांदीपुर द्वारा तैनात कई रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम द्वारा कैप्चर किया गया। इस डेटा के अध्ययन में भी ये बात साबित हुई कि मिसाइल सभी मापदंडो पर खरी उतरी। उड़ान परीक्षण को डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना (आईएएफ), भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल), और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा। 

बता दें कि आकाश-एनजी प्रणाली एक अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली है जो तेज गति से आती दुश्मन की मिसाइल, ड्रोन, या लड़ाकू विमान को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम   है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सफल फ्लाइट टेस्ट के लिए डीआरडीओ, आईएएफ, पीएसयू और इंडस्ट्री की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सिस्टम के सफल विकास से देश की वायु रक्षा क्षमताओं में और बढ़ोतरी होगी।

बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान ने हाल ही में अपने स्वदेशी लंबी दूरी के सटीक मारक हथियार, फतह-2 मिसाइल का परीक्षण किया है। करीब 400 किमी तक मार करने की प्रभावशाली रेंज वाली इस मिसाइल सिस्टम को पाकिस्तान ने भारत को ध्यान में रखकर ही विकसित किया है। इस मिसाइल प्रणाली को सैटेलाइट से जोड़ा गया है, जिससे इसका नेविगेशन सिस्टम और भी ज्यादा सटीक हो जाता है। ऐसे में भारत के लिए ये जरूरी हो गया था कि उसके पास  आकाश (AKASH-NG) जैसी मिसाइल रोधी प्रणाली हो। हालांकि भारत ने पहले से ही रूस से मिले एस-400 एंटी मिसाइल सिस्टम को सीमा पर तैनात कर रखा है।

टॅग्स :DefensemissileडीआरडीओDRDO
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