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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने पार्टी नेतृत्व को लेकर उठाए गंभीर सवाल, कहा- सभी डरे हुए हैं, बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे 

By रामदीप मिश्रा | Updated: February 20, 2020 10:47 IST

संदीप दीक्षित ने कहा कि हम वास्तव में अपने वरिष्ठ नेताओं से निराशा महसूस कर रहे हैं। उन्हें आगे आना होगा। कई महीनों से पार्टी अध्यक्ष को खोजा नहीं जा सका है।

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ठळक मुद्देसंदीप दीक्षित ने कहा कि कांग्रेस में कम से कम छह-आठ ऐसे नेता हैं जो पार्टी का नेतृत्व करने में सक्षम हैं।वरिष्ठ नेताओं पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी आप निष्क्रियता चाहते हैं क्योंकि आप नहीं चाहते हैं कि कुछ हो।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हार चुकी है और उसे एक भी सीट नहीं मिली। इस बीच दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री रहीं दिवंगत शीला दीक्षित के बेटे और कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने पार्टी के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता इतने महीनों के बाद भी नया अध्यक्ष नहीं खोज पाए हैं। सभी डरे हुए हैं कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दीक्षित ने कहा कि कांग्रेस में कम से कम छह-आठ ऐसे नेता हैं जो पार्टी का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। वरिष्ठ नेताओं पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कभी-कभी आप निष्क्रियता चाहते हैं क्योंकि आप नहीं चाहते हैं कि कुछ हो।

संदीप दीक्षित ने कहा, 'हम वास्तव में अपने वरिष्ठ नेताओं से निराशा महसूस कर रहे हैं। उन्हें आगे आना होगा। उनमें से अधिकांश, जो राज्यसभा हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं, यहां तक कि हमारे कुछ वर्तमान सीएम भी हैं जो बहुत वरिष्ठ हैं, मुझे लगता है अब समय है कि वो लोग आगे आएं और पार्टी को आगे बढ़ाएं।' 

उन्होंने कहा कि पार्टी में अमरिंदर सिंह, अशोक गहलोत, कमलनाथ हैं वो एक साथ क्यों नहीं आते हैं, अन्य लोगों को इधर-उधर करते हैं? इसके अलावा एके एंटनी, पी चिदंबरम, सलमान खुर्शीद, अहमद पटेल भी हैं। इन सभी ने कांग्रेस के लिए बहुत कुछ किया है। वे अपनी राजनीति की शाम में हैं, उनके पास शायद चार या पांच साल हैं। मुझे लगता है कि यह उनके लिए बौद्धिक रूप से योगदान करने का एक अच्छा समय है। वे नेतृत्व चयन प्रक्रिया में, केंद्र में या राज्यों में या कहीं और जा सकते हैं।

संदीप दीक्षित इन मामलों पर सवाल उठाने वाले अकेले नहीं हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने राय दी थी कि पार्टी को अपने पुनर्गठित करने की जरूर जोकि 'काफी समाजवादी' बनी हुई है और धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीयता के ब्रांड के सवाल पर स्पष्टता ला रही है।

 

 

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