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मोहन के जिस सुझाव को CM रहते शिवराज ने ठुकराया,उसे CM मोहन अब करेंगे लागू

By अनुराग.श्रीवास्तव@लोकमत.इन | Updated: February 26, 2024 13:54 IST

मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस ने जिस विभाग के नाम बार-बार बदले, उस विभाग का पता बदलने की तैयारी मोहन सरकार ने की है। आखिर हर सरकार में क्यों चर्चा में रहता है यह सरकारी विभाग, आखिर क्यों अब मोहन सरकार विभाग का पता बदलने की तैयारी में है, खास रिपोर्ट....

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ठळक मुद्देएमपी में धार्मिक फैसले उज्जैन से होंगे,धर्मस्व विभाग को महाकाल की नगरी शिफ्ट करने की तैयारीशिवराज सरकार में जिस सुझाव को नहीं माना गया,उस पर अब मोहन सरकार का अमल

एमपी की हर सरकार में क्यों सुर्खियों रहता है धर्मस्व विभाग

मध्य प्रदेश का धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग.... यह वह विभाग है जो हर सरकार में चर्चा में रहता है... धर्म और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों से लेकर बड़े कार्यक्रमों के आयोजन तक इस विभाग की चर्चा होती है.... लेकिन यह विभाग पिछली तीन सरकार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा है। इसके पीछे बड़ी वजह विभाग के नाम बदलने के साथ सरकारों के खुद की धार्मिक छवि चमकाना रहा है।

-  तत्कालीन शिवराज सरकार में 2016 में आनंद विभाग का गठन किया...इसे धर्मस्व से जोड़ा गया।

 - कमलनाथ ने सत्ता में आने पर धर्मस्व को अध्यात्म विभाग में तब्दील कर दिया।

- कमलनाथ के सत्ता से जाने पर शिवराज ने प्रदेश की कमान संभालते ही फिर से आनंद विभाग का गठन किया और आध्यात्मिक विभाग का नाम बदलकर धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग कर दिया।

धर्मस्व विभाग उज्जैन होगा शिफ्ट

लेकिन अब विभाग का पता ही बदलने की तैयारी है। मोहन यादव ने धार्मिक न्यास व धर्मस्व विभाग का संचालन  भोपाल से उज्जैन शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है। इस प्रस्ताव को जल्दी कैबिनेट में लाया जाएगा।

धर्मस्व संचालनालय को शिफ्ट करने की वजह 

दरअसल खबर यह है की मोहन यादव ने मंत्री रहते हुए तत्कालीन शिवराज सरकार को सुझाव दिया था की उज्जैन में मंदिर सबसे ज्यादा है और धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग का डायरेक्टेड उज्जैन में होना चाहिए। तब अफसर ने व्यावहारिक दिक्कत बताते हुए इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। लेकिन अब मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस विभाग को उज्जैन शिफ्ट करने की मंजूरी हो गई है।

कितना हैै धर्मस्व विभाग का बजट

धार्मिक न्यास- धर्मस्व विभाग का सालाना बजट लगभग 100 करोड रुपए होता है। यह बजट हर साल बढ़ता है। 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहसथ से पहले मोहन यादव का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। 

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