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कूनो में चौथे चीते की मौत, मादा चीता ज्वाला के शावक ने दम तोड़ा, मौत की वजह स्पष्ट नहीं

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: May 23, 2023 16:31 IST

कूनो में ये चौथे चीते की मौत है। मादा चीते ज्वाला और उसके शावकों को एक बड़े बाड़े में रखा गया था। मादा चीता ज्वाला के शावक की मौत किस कारण हुई इसका पता अब तक नहीं चल पाया है। मौके पर डॉक्टरों की टीम मौजूद है।

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ठळक मुद्देएक बार फिर कूनो से बुरी खबर आई हैमादा चीता ज्वाला के शावक की मौत हुईकूनो में ये चौथे चीते की मौत है

नई दिल्ली: भारत में चीतों को फिर से बसाने की कोशिशों के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीते लाकर बसाए गए थे। लेकिन एक बार फिर कूनो से बुरी खबर आई है। यहां बीते महीने मादा चीता ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया था जिमनें से एक ने 23 मई को दम तोड़ दिया। 

कूनो में ये चौथे चीते की मौत है। मादा चीते ज्वाला और उसके शावकों को एक बड़े बाड़े में रखा गया था। मादा चीता ज्वाला के शावक की मौत किस कारण हुई इसका पता अब तक नहीं चल पाया है। मौके पर डॉक्टरों की टीम मौजूद है। मादा चीता ज्वाला ने जब 4 शावकों को जन्म दिया था तब वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई थी। सभी शावकों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जा रही थी। 

कूनो में अब तक शावक को लेकर 4 चीतों की मौत हो चुकी है। मार्च में मादा चीता सासा, अप्रैल में उदय नाम के चीते की मौत और फिर मादा चीता दक्षा के दम तोड़ने के बाद शावक की मौत अब चौथी घटना है। 3 चीतों और एक शावक की मौत के बाद अब कूनो में 24 में से 20 चीते बचे हैं। जिसमे से 17 नर मादा चीते ओर 3 शावक है।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला इस साल मार्च में शुरू हुआ जब नामीबिया की मादा चीता साशा की गुर्दे की बीमारी के कारण मौत हो गई। अप्रैल में, दक्षिण अफ्रीका से लाए गए एक छह वर्षीय नर चीता उदय की कार्डियोपल्मोनरी विफलता के कारण मृत्यु हो गई। मई में सरकार की चीता संरक्षण परियोजना को एक और झटका लगा। एक दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता दक्षा की मौत नर चीता द्वारा संबंध बनाते समय आक्रामकता के कारण हो गई।

हालांकि कूनो में हो रही चीतों की मौतों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। चीतों को दूसरी जगह शिफ्ट करने को भी लेकर बार-बार चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो में इतने चीतों के रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। 

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