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केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे श्रमिक संगठन, 28 और 29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, जानिए क्या है मांग, कौन-कौन होंगे शामिल 

By भाषा | Updated: March 23, 2022 20:42 IST

केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्यस्तरीय विभिन्न श्रमिक संगठनों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की गयी है। संगठनों ने यूनियन के सदस्यों को केंद्रीय श्रमिक संगठनों के फेसबुक पेज पर जोड़कर 24 मार्च को सार्वजनिक बैठक का भी निर्णय किया।

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ठळक मुद्दे28-29 मार्च को ‘गांव बंद’ का आह्वान किया है। कांग्रेस के प्रकोष्ठ केकेसी के अध्यक्ष उदित राज ने इसकी घोषणा की।तांबा, बैंक, बीमा समेत अन्य क्षेत्रों को हड़ताल को लेकर नोटिस दिये गये हैं।

नई दिल्लीः केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने सरकार की कामगार, किसान और जन विरोधी नीतियों के विरोध में 28 और 29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है।

श्रमिक संगठनों के बयान के अनुसार, कामगार विरोधी, किसान विरोधी, जन विरोधी तथा राष्ट्र विरोधी नीतियों के खिलाफ 28-29 मार्च, 2022 को दो दिन की हड़ताल को लेकर विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में तैयारियों के सिलसिले में केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच की 22 मार्च, 2022 को दिल्ली में बैठक हुई।

बयान में कहा गया है कि एस्मा (हरियाणा और चंडीगढ़, क्रमशः) के खतरे के बावजूद रोडवेज, परिवहन और बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय किया है। इसमें कहा गया है कि बैंक और बीमा समेत वित्तीय क्षेत्र भी हड़ताल में शामिल होंगे। कोयला, इस्पात, तेल, दूरसंचार, डाक, आयकर, तांबा, बैंक, बीमा समेत अन्य क्षेत्रों को हड़ताल को लेकर नोटिस दिये गये हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 8.5 प्रतिशत से घटाकर 8.1 प्रतिशत कर दिया गया

बयान के अनुसार, बैठक में इस तथ्य पर ध्यान दिया गया कि हाल ही में हुए राज्यों के चुनावों के परिणामों से उत्साहित केंद्र की भाजपा सरकार ने मेहनतकश लोगों के हितों के खिलाफ नीतियों को जोर-शोर से लागू करना शुरू कर दिया है। कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को 8.5 प्रतिशत से घटाकर 8.1 प्रतिशत कर दिया गया है।

साथ ही पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी आदि के दाम में में अचानक वृद्धि की गयी है। सार्वजनिक उपक्रमों की जमीन को बाजार पर चढ़ाने (मौद्रीकरण योजना) को लेकर कदम उठाये जा रहे हैं। बैठक में इन नीतियों की आलोचना की गयी। बैठक में संयुक्त किसान मोर्चा की घोषणा का स्वागत किया गया।

उन्होंने 28-29 मार्च को ‘गांव बंद’ का आह्वान किया है। बयान के अनुसार, बैठक में केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्यस्तरीय विभिन्न श्रमिक संगठनों से हड़ताल में शामिल होने की अपील की गयी है। संगठनों ने यूनियन के सदस्यों को केंद्रीय श्रमिक संगठनों के फेसबुक पेज पर जोड़कर 24 मार्च को सार्वजनिक बैठक का भी निर्णय किया।

संयुक्त मंच में इंटक (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस), एटक (ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस), एचएमएस (हिंद मजदूर सभा), सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियनन्स), एआईयूटीयूसी (ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर), टीयूसीसी (ट्रेड यूनियन कॉर्डिनेशन सेंटर), सेवा (सेल्फ एम्प्लॉयड वुमेन्स एसोसएिशन), एआईसीसीटीयू (ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियनन्स), एलपीएफ (लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन) और यूटीयूसी (यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस) शामिल हैं।

कांग्रेस ने श्रमिक संगठनों की हड़ताल का समर्थन किया

अखिल भारतीय असंगठित कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) ने बुधवार को कहा कि वह 28 और 29 मार्च को विभिन्न श्रमिक संगठनों की ओर से आहूत हड़ताल का समर्थन करेगी। कांग्रेस के प्रकोष्ठ केकेसी के अध्यक्ष उदित राज ने इसकी घोषणा की।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे नेता राहुल गांधी श्रमिक संगठनों की मांगों के पक्ष में चिंता व्यक्त कर रहे हैं। केकेसी स्पष्ट रूप से न केवल लिखित रूप में समर्थन करता है बल्कि जहां भी संभव हो हड़ताल में भाग लेगा ।’’ उदित राज ने कहा, ‘‘श्रम कानूनों को समाप्त करना, सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध, तथा कई अन्य मांगें ये श्रमिक संगठन कर रहे हैं जिनका हम समर्थन करते हैं।’’

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