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सीईईडब्ल्यू के डॉक्टर अरुणाभा घोष संयुक्त राष्ट्र के नेट-जीरो उत्सर्जन पर गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समूह के पैनल में हुए शामिल

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 2, 2022 16:27 IST

संयुक्त राष्ट्र की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक सीईईडब्ल्यू प्रमुख डॉक्टर अरुणाभा घोष को जिस 16 सदस्यीय पैनल में शामिल किया गया है, वह यूएन प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस को गैर-राजकीय संस्थाओं मसलन व्यवसायों, निवेशकों, शहरों और क्षेत्रों की नेट-जीरो उत्सर्जन संबंधी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने और मानकों को तैयार करने में सलाह देगा।

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ठळक मुद्देडॉक्टर अरुणाभा घोष यूएन के विशेषज्ञ पैनल में शामिल होने वाले इकलौते दक्षिण एशियाई सदस्य हैंयह पैनल नेट-जीरो उत्सर्जन को मजबूत करने और मानकों को तैयार करने में यूएन की सहायता करेगाडॉ अरुणाभा घोष ने कहा कि यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से नियुक्ति पाकर गर्व महसूस कर रहा हूं

दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीते शुक्रवार को गैर-राजकीय संस्थाओं की नेट-जीरो उत्सर्जन संबंधी प्रतिबद्धताओं के लिए गठित उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समूह के पैनल में ऑन एनर्जी, एनवारनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर अरुणाभा घोष को नियुक्त किया है।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 16 सदस्यीय यह पैनल गैर-राजकीय संस्थाओं मसलन व्यवसायों, निवेशकों, शहरों और क्षेत्रों की नेट-जीरो उत्सर्जन संबंधी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने और मानकों को तैयार करने में सहायता करेगा। डॉक्टर घोष इस विशेषज्ञ समूह में शामिल तीन एशियाई सदस्यों में से एक और दक्षिण एशियाई देशों से इकलौते सदस्य हैं।

इस विशेषज्ञ पैनल की अध्यक्षता कनाडा की पूर्व पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री कैथरीन मैककेना करेंगी। इसके कुछ अन्य सदस्यों में माली के पूर्व प्रधानमंत्री ओउमर टाटाम ली, ग्लोबल कमीशन फॉर इकोनॉमी एंड क्लाइमेट के आयुक्त श्री कार्लोस लोपस और कैलिफोर्निया एयर रिसोर्स बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष मैरी निकोल्स भी शामिल होंगी।

यूएन के इस पैनल में हुई अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉक्टर अरुणाभा घोष ने कहा, “मैं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा कैथरीन मैककेना की अध्यक्षता वाले गैर-राजकीय संस्थाओं की नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं पर उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ पैनल में काम करने के लिए नियुक्त किए जाने पर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं।"

डॉक्टर घोष ने आगे कहा, "हमें जलवायु संकट के निपटने के लिए किये गये वादों से कहीं ज्यादा काम करने और कदम उठाने की जरूरत है और क्लाइमेट एक्शन (जलवायु संकट रोकने के उपायों को लागू करना) की दिशा में 'हम पर विश्वास करें' से कहीं ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके अलावा हमें आज के समय में क्लाइमेट एक्शन को विश्वसनीयता के धरातल पर विकसित करने की जरूरत है।”

डॉक्टर घोष ने वैश्विक स्तर पर एक सलाहकार के रूप में विभिन्न सरकारों, उद्योगों, नागरिक समाज के संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम किया है। साल 2018 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यूएन कमेटी फॉर डेवलेपमेंट पॉलिसी में भी नामित किया था। उन्हें इस साल भी दिसंबर 2024 तक के दूसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नामित किया गया है।

डॉक्टर अरुणाभा घोष को साल 2020 में भारत सरकार ने एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट चेंज ट्रैक फॉर इंडियाज साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पॉलिसी (STIP2020) का भी सह-अध्यक्ष नियुक्त किया था। इसके अलावा साल 2021 में उन्हें जी-20 सम्मेलन के लिए जलवायु और ऊर्जा पर टी-20 टास्क फोर्स का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसकी बैठक 2022 में इंडोनेशिया की अध्यक्षता में होने वाली है।

हाल ही में उन्हें 2023 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले जी-20 सम्मेलन के लिए भारत सरकार के जी-20 फाइनेंस ट्रैक एडवाइजरी ग्रुप में नियुक्त किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार डॉक्टर अरुणाभा घोष सहित यह उच्च स्तरीय विशेषज्ञ पैनल चार विशिष्ट क्षेत्रों में यूएन प्रमुख को सलाह देगा।

• नेट-जीरो लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए वर्तमान मानक और परिभाषाएं• नेट-जीरो प्रतिज्ञाओं के उद्देश्यों, माप और रिपोर्टिंग के आकलन में इस्तेमाल करने के लिए विश्वसनीयता संबंधी मानक• नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं और कार्बन उत्सर्जन घटाने की योजनाओं को लागू करने की दिशा में प्रगति के सत्यापन और लेखांकन की प्रक्रियाएं• मानकों और शर्तों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के नियमों में बदलने की एक रूपरेखा

टॅग्स :संयुक्त राष्ट्रAntonio GuterresभारतEnvironment Department
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