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Fraud Case : CBI के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को मिली क्लीन चिट, अब कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 11, 2020 20:06 IST

अस्थाना के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें क्लीन चिट दे दिया गया। अब बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी।

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ठळक मुद्देसीबीआई द्वारा दिए गए आरोप पत्र में दुबई के व्यवसायी और कथित मिडिलमैन मनोज प्रसाद का नाम आरोपी के तौर पर शामिल है। पिछले साल नौ अक्टूबर 2019 को दो और महीने देते हुए अदालत ने कहा था कि जांच में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं हो सकती है और यह पूरी होनी चाहिए।

सीबीआई घूस कांड मामले में पूर्व  स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को क्लीन चिट दे दी गई है। दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मंगलवार को सीबीआई ने अपना पहला आरोप पत्र को सीबीआई की विशेष अदालत को सौंपा। इसमें  राकेश अस्थाना का नाम शामिल नहीं था। अस्थाना के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें क्लीन चिट दे दिया गया। अब बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी।

बता दें कि तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने अस्थाना पर रिश्वत का इल्जाम लगाया था। जिसके बाद अस्थान ने आलोक पर दुश्मनी के तहत फंसाने का आरोप लगाया था। सीबीआई द्वारा दिए गए आरोप पत्र में दुबई के व्यवसायी और कथित मिडिलमैन मनोज प्रसाद का नाम आरोपी के तौर पर शामिल है। इस मामले में सीबीआई ने बताया कि मनोज प्रसाद और उनके कुछ साथी सीबीआई के कई बड़े अधिकारियों को जानने की बात कर लोगों को ठगते थे। 

इसी दौरान वह हैदराबाद के व्यवसायी सतीश सना बाबू से मिले थे और पांच करोड़ की रिश्वत मांगी थी। इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही जांच पूरी करने के लिए लगातार समय बढ़ाने की मांग को लेकर सीबीआई को फटकार भी लगाई थी।  उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी 2019 को सीबीआई को छानबीन पूरी करने के लिए 10 हफ्ते का समय दिया था । पिछले साल नौ अक्टूबर 2019 को दो और महीने देते हुए अदालत ने कहा था कि जांच में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं हो सकती है और यह पूरी होनी चाहिए।

जानें पूरा मामला

राकेश अस्थाना, एजेंसी के तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार और कारोबारी मनोज प्रसाद पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और आपराधिक कदाचार के आरोपों पर मामला दर्ज किया गया था। मांस निर्यात कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मामले में पूर्व में जांच अधिकारी कुमार को हैदरबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना के बयान दर्ज करने में फर्जीवाड़े के आरोपों पर गिरफ्तार किया गया था। सना ने मामले में राहत पाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी थी।  

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