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Baghpat Lok sabha Seat: चरण सिंह के गढ़ में बागपत में त्रिकोणात्मक संघर्ष, जयंत चुनाव मैदान में नहीं फिर भी उनकी प्रतिष्ठा दांव पर

By राजेंद्र कुमार | Updated: March 22, 2024 17:49 IST

Lok Sabha Polls 2024: राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर रालोद के सिंबल पर डा.राजकुमार सांगवान चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ समाजवादी पार्टी (सपा) ने मनोज चौधरी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रवीण बैसला को चुनाव मैदान में उतारा है।

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ठळक मुद्देकरीब तीन दशक तक इस सीट पर चौधरी परिवार की चौधराहट रही हैइस सीट पर रालोद के सिंबल पर डा.राजकुमार सांगवान चुनाव लड़ रहे हैंजबकि उनके खिलाफ सपा ने मनोज चौधरी और बसपा ने प्रवीण बैसला को चुनाव मैदान में उतारा

लखनऊ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश बागपत संसदीय लोकसभा सीट यदि वीआईपी कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह सीट भूतपूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की राजनीति कर्मभूमि रही है। इतना ही नहीं इस सीट ने कई कैबिनेट मंत्री तक दिए हैं। ऐसे में इस क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले हरेक दल के नेताओं का सपना इस संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का भी रहता है। इस बार भी पश्चिमी यूपी का सियासी गढ़ और जाटलैंड माने जाने वाली इस सीट पर पूरे देश की नजरें हैं। तो इसकी दो वजह हैं। पहली वजह है, 53 साल बाद इस सीट से चौधरी परिवार के किसी सदस्य का चुनाव मैदान में ना होना और दूसरी वजह है, पहली बार इस सीट से तीन प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतरना जो पहली पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर रालोद के सिंबल पर डा.राजकुमार सांगवान चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ समाजवादी पार्टी (सपा) ने मनोज चौधरी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रवीण बैसला को चुनाव मैदान में उतारा है। राजकुमार और मनोज जाट बिरादरी से हैं जबकि प्रवीण बैसला गुर्जर समुदाय से आते हैं। जाट, मुस्लिम और दलित बाहुल्य इस सीट पर रालोद, सपा और बसपा का मजबूत वोट बैंक हैं। फिलहाल इस सीट के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यहां अभी त्रिकोणात्मक चुनावी संघर्ष होता दिख रहा है।

वैसे करीब तीन दशक तक इस सीट पर चौधरी परिवार की चौधराहट रही है, लेकिन वर्ष 2012 में हुए दंगे के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के चलते यहां की सामाजिक समरसता में जो विष घोला गया है, उसका असर यहां पर भी हुआ है। उसके प्रभाव को कम करने के प्रयास में रालोद प्रमुख चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी दोनों ही इस सीट से चुनाव हारे। 

ऐसे में इस बार लोकसभा चुनावों के ठीक पहले चौधरी अजीत सिंह के पुत्र जयंत चौधरी सपा से गठबंधन तोड़कर एनडीए में शामिल हो गए। अब नए साथी यानी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए जयंत की नजर अपने दादा चौधरी चरण सिंह और पिता चौधरी अजीत सिंह की विरासत (बागपत) पर भी रालोद का झण्डा फ़हराने की ही है। जयंत चौधरी की इस मंशा को पूरा करने के लिए भाजपा ने पाने सिटिंग सांसद सत्यपाल सिंह का टिकट काट कर यह सीट को रालोद को दी हैं। जयंत चौधरी इस सीट को हासिल करने के लिए जीन जान से जुट गए हैं। उनकी चुनावी सभाओं को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि चुनाव मैदान में ना होने के बाद भी इस सीट पर जयंत की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।   बागपत का सियासी गणित 

बागपत सीट पर करीब 16 लाख वोटरों में 28 फीसदी जाट, 25 फीसदी मुसलमान, 12 फीसदी दलित, 6 फीसदी ब्राह्मण और बाकी ठाकुर तथा पिछड़ी जातियां हैं. जाट समुदाय के वोटरों के बाद यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। जाट और मुसलमान वोट मिल जाएं तो आधे वोट हो गए. यह चौधरी चरण सिंह और चौधरी अजित की ताकत रही है। अजित की ये ताकत ही इस बार उनके पुत्र जयंत चौधरी की ताकत बनकर रालोद उम्मीदवार राजकुमार को जीता सकती है. रालोद के महासचिव गिरीश चौधरी का यह कहना है। बीते लोकसभा चुनाव का रिजल्ट : सत्यपाल सिंह (भाजपा) : 5,25,789 जयंत चौधरी (रालोद) : 5,02,287

टॅग्स :लोकसभा चुनाव 2024बागपतचौधरी चरण सिंहजयंत चौधरी
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