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Assembly Elections 2023: एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में मतदान के लिए हो सकता है तारीखों का ऐलान, जानिए कौन कहां पर है टक्कर में

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: October 9, 2023 09:29 IST

चुनाव आयोग मध्य प्रदेश की 230 सीटों, छत्तीसगढ़ की 90 सीटों, राजस्थान की 200 सीटों, तेलंगाना की 119 सीटों और मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों पर 15 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच में मतदान करा सकता है।

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ठळक मुद्देचुनाव आयोग एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम के चुनाव तारीख का ऐलान कर सकता हैचुनाव आयोग इन पांच राज्यों में 15 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच मतदान करा सकता हैअगर आयोग आज तारीखों का ऐलान करता है तो सभी राज्यों में चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी

नई दिल्ली: केंद्रीय चुनाव आयोग देश के 5 प्रमुख राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना विधानसभा चुनावों के तारीख का ऐलान आज कर सकता है। खबरों के मुताबिक चुनाव आयोग मध्य प्रदेश की 230 सीटों, छत्तीसगढ़ की 90 सीटों, राजस्थान की 200 सीटों, तेलंगाना की 119 सीटों और मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों पर 15 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच में मतदान करा सकता है।

दरअसल बीते शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कार्यक्रमों के संबंध में सभी पांच राज्यों के पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की थी और सभी तैयारियों का जायजा लिया था। अगर आयोग आज सभी राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देता है तो सभी चुनावी राज्यों में आदर्श चुनाव आचार संहिता प्रभावी हो जाएगी और निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए सभी पांचों राज्यों का शासन-प्रशासन पूरी तरह से चुनाव आयोग के हाथों में आ जाएगा।

खबरों के अनुसार बीते 2018 के विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी चुनाव आयोग राजस्थान, मध्य प्रदेश, मिजोरम और तेलंगाना में मतदान एक ही चरण में संपन्न करा सकता है, वहीं नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ में सुरक्षा के मद्देनजर पिछली बार की तरह दो चरणों में मतदान हो सकते हैं।

इसके अलावा आयोग के सूत्रों का कहना है कि सभी पांचों राज्यों में मतदन संपन्न होने के बाद वोटों की गिनती एक साथ 10 से 15 दिसंबर के बीच हो सकती है।

वहीं सभी पांचों राज्यों की मौजूदा सरकारों की बात करें तो मिजोरम में एनडीए के सहयोगी सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट सरकार का कार्यकाल इस साल 17 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। वहीं तेलंगाना की बीआरएस सरकार, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार, छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार का कार्यकाल जनवरी 2024 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है।

मध्य प्रदेश

अगर राज्यवार बात करें तो सबसे मध्य प्रदेश का जिक्र करते हैं, जहां साल 2018 के विधानसभा चुनाव में विधासनभा की 230 सीटों में कांग्रेस पार्टी बहुमत के करीब रही और उसने 114 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में भाजपा को 109 सीटों पर सफलता मिली थी। वहीं अगर वोट प्रतिशत की बात करें कांग्रेस को करीब 41 फीसदी जबकि भाजपा को 41 फीसदी से कुछ ज्यादा वोट हासिल हुए थे।

उस वक्त कांग्रेस के कमलनाथ ने निर्दलीयों, बसपा और सपा की मदद से बहुमत के लिए जरूरी 116 सीटों का आंकड़ा पूरी करके सरकार का गठन किया था लेकिन कांग्रेस के आंतरिक कलह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के कारण कमलनाथ सरकार गिर गई थी और सूबे की कमान फिर से शिवराज सिंह चौहान के पास चली गई थी।

छत्तीसगढ़

अब बात करते हैं छत्तीसगढ़ की तो यहां पर साल 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए 90 सीटों पर दो चरणों में मतदान संपन्न हुए थे। पहले चरण में 18 सीटों पर और दूसरे चरण में 72 सीटों पर मतदान हुआ था।

उस चुनाव कांग्रेस ने भूपेश बघेल की अगुवाई में 90 में से 68 सीटें जीतकर भाजपा को मात दी थी और भाजपा महज 15 सीटों पर सिमट गई थी। छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 90 विधानसभा सीटों में 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। साल 2018 के चुनाव में 1.85 करोड़ मतदाताओं ने छत्तीसगढ़ की सरकार को चुना था।

राजस्थान

राजस्थान में साल 2018 के सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प थे। विधानसभा की कुल 200 सीटों में से अलवर की रामगढ़ सीट छोड़कर बाकी 199 सीटों पर 7 दिसंबर 2018 को एक साथ मतदान हुए थे।

राजस्थान में कांग्रेस 199 सीटों पर हुए चुनाव में 99 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं भाजपा को महज 73 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस और भाजपा के अलावा बसपा को 6, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्‍ससिस्‍ट) को 2, भारतीय आदिवासी पार्टी को 2, राष्ट्रीय लोक दल को एक, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को 3 और निर्दलीयों के खाते में 13 सीटों आयी थीं।

कांग्रेस सबसे बड़ी जरूर थी लेकिन वो बहुमत की 100 सीटों से एक सीट पीछे थी। हालांकि अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस ने सूबे में वसुंधरा को सत्ता को बेदखल करते हुए सरकार बना ली थी।

वहीं साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुल 163 सीटें मिलीं थी। जबकि कांग्रेस को 21, बसपा को तीन, एनपीपी को चार एवं निर्दलीय तथा अन्य को नौ सीटें मिलीं थी। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा बिना वसुंधरा राजे को चेहरा बनाए उतर रही है और उसका मानना है कि वो सत्तधारी कांग्रेस को मात दे कर रहेगी। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि वो लगातार दूसरी बार सरकार बनाएंगे और वो भी पूर्ण बहुमत के साथ।

तेलंगाना

साल 2018 में दक्षिण के राज्य तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव की अगुवाई में तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) जो कि अब भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) हो चुकी है। उसने विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल किया था। टीआरएस ने केसीआर की अगुवाई में सूबे की कुल 119 में से 88 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

वहीं विरोधी दल कांग्रेस को महज 19 सीटें मिली थी। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को उस चुनाव में कुल 7 सीटें मिली थीं। इसके अलावा भाजपा को 1 सीट और चंद्रबाबू नायजू की पार्टी तेलुगू देशम को 2 सीटें मिली थी।

मिजोरम

जहां तक मिजोरम का सवाल है तो साल 2018 में मिजोरम की 40 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में मिजो नेशलन फ्रंट (एमएनएफ) ने कांग्रेस को करारी मात देते हुए 2008 के बाद सत्ता में वापसी की थी। सूबे के कुल 40 सीटों में एमएनएफ ने बहुमत हासिल करते हुए 26 सीटें जीती थीं, वहीं कांग्रेस को 26 सीटों का नुकसान हुआ था और वह सिर्फ 5 सीट पर जीत कर सत्ता से बाहर हो गई थी।

इसके अलावा साल 2018 के चुनाव में भाजपा ने पहली बार मिजोरम में खाता खोला था और 1 सीट उसके खाते में भी आयी थी। मिजोरम के तत्कालीन मुख्यमंत्री लाल थनहवला चम्फाई खुद एमएनएफ के टीजे लालनंतलुआंग से चनाव हार गये थे। वहीं साल 2013 के चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने कुल 40 सीटों में से 34 सीटों पर जीत हासिल की थी वहीं एमएनएफ को पांच सीटों पर संतोष करना पड़ा था। 

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