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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली अध्यादेश मुद्दे पर कांग्रेस का समर्थन न मिलने के बाद कांग्रेस शासित चुनावी राज्यों में खोला मोर्चा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 4, 2023 15:14 IST

अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस द्वारा दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ ढुलमुल रवैये अपनाने पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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ठळक मुद्देअरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस द्वारा दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ ढुलमुल रवैये अपनाने से हुए नाराजकेजरीवाल ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के खिलाफ खोल दिया है चुनावी मोर्चा केजरीवाल के इस कदम से सीधे तौर पर कांग्रेस को चोट पहुंचेगी और भाजपा को फायदा होगा

दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र के दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रूख अख्तियार करते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ में अपने चुनावी बिगुल को फूंक दिया है। इस कार्य में अरविंद केजरीवाल के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी कंधे से कंधा मिलाकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल का समर्थन कर रहे हैं।

दरअसल अरविंद केजरीवाल विपक्ष की पटना बेठक से ही कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी प्रदर्शित कर रहे हैं क्योंकि पटना में अरविंद केजरीवाल द्वारा अध्यादेश के मुद्दे पर किये हंगामे के बावजूद अन्य पार्टियों ने कांग्रेस पर दबाव बनाने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब केजरीवाल इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के साथ आर-पार की लड़ाई पर उतर आये हैं।

समाचार वेबसाइट डेक्कन हेराल्ड के अनुसार सीएम केजरीवाल अब उसके सीधे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कांग्रेस के मजबूत किले में गहरी सेंधमारी का प्रयास कर रहे हैं। जाहिर है केजरीवाल के इस कदम से सीधे तौर पर कांग्रेस को चोट पहुंचेगी और उसके विपक्ष में टक्कर देनी वाली भाजपा के लिए केजरीवाल का यह कदम फायदेमंद रहेगा।

इससे पूर्व अरविंद केजरीवाल ने कर्नाटक चुनाव में भी ऐसा ही किया था लेकिन पार्टी के प्रत्याशी खड़ा करने के बाद भी चुनाव प्रचार के लिए कर्नाटक नहीं गये। जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला और उसने सत्ताधारी भाजपा को हराकर कर्नाटक उसके हाथ से छीन लिया था। इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल गुजरात और गोवा के चुनाव में अपने प्रत्याशियों को उतार कर कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले लड़ाई में पीछे धकेल दिया था।

अब मजे की बात यह है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस का खेल न केवल राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बिगाड़ने का इरादा रखती है, बल्कि वह तेलंगाना में दिलचस्प दिका रही है। जिसका साफ मतलब है कि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस द्वारा अध्यादेश मुद्दे पर समर्थन न देने के कांग्रेस के इरादे पर चोट पहुंचाने की तैयारी में लग गये हैं।

कांग्रेस केंद्र के उस विवादास्पद अध्यादेश पर अपना रुख घोषित करने को तैयार नहीं है, जो दिल्ली सरकार की सेवा से संबद्ध नौकरशाहों का नियंत्रण केंद्र सरकार को देता है। कांग्रेस बार-बार आप से इंतजार करने के लिए कह रही है, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की बात को नकारते हुए बीते 1 जुलाई से मध्य प्रदेश में रैली करके साफ कर दिया कि वो कांग्रेस को उसी के गढ़ में चुनौती देंगे।

इसके साथ ही आप यह ऐलान भी कर चुकी है कि वह किसी भी विपक्षी गठबंधन या कांग्रेस की उपस्थिति वाली बैठकों का हिस्सा नहीं बनेगी, जब तक कि कांग्रेस अध्यादेश पर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर देती। लेकिन कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस संबंध में कोई स्पष्ट राय देने से इनकार कर दिया, वहीं अन्य दलों ने कहा कि आप को इस बात पर जोर नहीं देना चाहिए कि कांग्रेस उसी दिन अपने समर्थन की घोषणा कर दे।

इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस के प्रति हमलावर रूख अख्तियार करते हुए जालंधर के दिवंगत हुए कांग्रेस के लोकसभा सांसद संतोख सिंह की सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी को उतारने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बात पर जोर दिया है कि आप को कांग्रेस की खाली हुई सीट पर जरूर उपचुनाव लड़ना चाहिए।

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