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चार साल मोदी सरकारः क्या पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे पाए नरेंद्र मोदी?

By आदित्य द्विवेदी | Updated: May 26, 2018 08:33 IST

4 Years of Modi Government: भारत-पाकिस्तान रिश्तों ने कब-कब ली करवट?

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पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए। ये लव लेटर लिखना बंद करना चाहिए। पाकिस्तान जो भाषा में समझे समझाना चाहिए।

ये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द हैं। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी के ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में उनके नाम की सुगबुगाहट जोर पकड़ने लगी थी। उन्होंने तत्कालीन यूपीए-2 सरकार की पाकिस्तान के प्रति नीतियों की घोर आलोचना की थी। साल 2014 आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में एनडीए ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई और प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए नरेंद्र मोदी। मई 2018 में एनडीए सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। इन चार सालों में नरेंद्र मोदी क्या पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे पाए हैं? इसी की पड़ताल करती ये विशेष रिपोर्ट...

तारीख थी 26 मई 2014। नरेंद्र मोदी देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले रहे थे। शपथ ग्रहण में तमाम दिग्गज हस्तियों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी निमंत्रण भेजा गया। नवाज शरीफ समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की।  इस मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने ट्वीट करके कहा कि नवाज शरीफ के साथ उनकी कई भावुक बातें हुई। पीएम मोदी ने नवाज शरीफ की मां के लिए एक शॉल का तोहफा भी भेजा था। नरेंद्र मोदी के इस कदम को दोनों देशों के बीच नए रिश्ते कायम करने की एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा गया। ये मोदी सरकार के चार साल में भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की किताब का 'आमुख' था।

जरूर पढ़ेंः- चार साल-मोदी सरकारः वादे और हकीकत

25 दिसंबर 2015। काबुल से नई दिल्ली लौटते वक्त अचानक खबर आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाहौर लैंड करेंगे। लाहौर के अलामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के साथ हेलिकॉप्टर से उनके जट्टी उमरा स्थित घर रायविंड पैलेस पहुंचे। करीब सवा घंटे की मुलाकात में पीएम मोदी ने नवाज शरीफ की नातिन को आशीर्वाद दिया। उसी दिन उनकी शादी थी। इसके अलावा दोनों नेताओं ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर वार्ता की। नवाज शरीफ के साथ उनके घर रायविंड पैलेस पर पीएम मोदी ने करीब सवा घंटे का वक्त बिताया और फिर नई दिल्ली के लिए वापस आ गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के बारे में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लिखा, 'That's like a statesman. पड़ोसी से ऐसे ही रिश्ते होने चाहिए।' 11 साल बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। दोनों देशों के रिश्ते को सकारात्मक रुख से देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये निहायत बड़ी पहल थी। यहां से कयास लगाए जाने लगे कि मोदी सरकार में दोनों देशों के बीच कई बड़ी समस्याओं का हल निकाल लिया जाएगा।

2015 तक दोनों देशों में सबकुछ ठीक चल रहा था। 2016 शुरु होते ही भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बिगड़ने शुरू हुए और बद से बदतर होते गए। 22 जनवरी 2016 की सुबह 3:30 बजे पंजाब के पठानकोट वायु सेना स्टेशन पर भारी मात्रा में असलहा बारूद से लैस आतंकवादियों ने आक्रमण कर दिया। आतंकियों से सुरक्षा बलों का संघर्ष पांच दिन तक चलता रहा। इस ऑपरेशन में 7 जवान शहीद हो गए जबकि सेना के जवानों ने जवाबी कार्रवाई में जवानों ने 6 आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया। आतंकियों के पाकिस्तानी होने के सबूत मिले। मोदी सरकार ने पाकिस्तान को सख्त प्रतिक्रिया दी। लेकिन बदले में मिला एक और आतंकी हमला।

कश्मीर के उड़ी सेक्टर में सीआरपीएफ कैंम्प पर 18 सितंबर 2016 को दशक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। रविवार की सुबह हुए इस हमले में 20 जवानों की मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में चार आतंकवादी भी मारे गए। पठानकोट हमले के बाद ये दूसरा बड़ा आतंकी हमला था। उड़ी हमले के लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। यहीं से भारत ने पाकिस्तान के साथ बात-चीत के रास्ते बंद कर दिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कायराना आतंकी हमले के बाद कहा कि इस घृणित हमले के दोषियों को दंडित किए बगैर छोड़ा नहीं जाएगा। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान एक आतंकी देश है और उसकी पहचान इसी तरह होनी चाहिए। उसे अलग-थलग किया जाना चाहिए।

तारीख 29 सितंबर 2016। सर्जिकल स्ट्राइक का दिन। भारत ने 15 दिनों के अंदर उड़ी हमले में शहीद सैनिकों का बदला लिया। भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर कई आतंकवादी लॉन्च पैड्स को तहस-नहस कर दिया। इसमें इसमें 30 से 35 आतंकवादी मारे गए। यह पहली बार हुआ जब पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का भारत ने खुलेआम ऐलान किया। ये भारत-पाकिस्तान के रिश्ते की ताबूत की आखिरी कील साबित हुई।

Expert Comment:- डिफेंस एक्सपर्ट प्रफुल्ल बख्शी सर्जिकल स्ट्राइक का ढिंढोरा पीटने को सही नहीं मानते। उनका कहना है कि ऐसे स्ट्राइक हमेशा होनी चाहिए। हमने पाकिस्तान पर हमला नहीं किया बल्कि पीओके पर हमला किया और वहां से आतंकियों को बाहर किया है। वो पाकिस्तान का नहीं है हमारा ही हिस्सा है।

Final Comment:- चार साल में मोदी सरकार ने पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने की कोशिश की है। पहले शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया जाना, फिर अचानक पाकिस्तान चले जाना। लेकिन भारत को बदले में मिले उरी और पठानकोट जैसे हमले। उसके बाद भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल और बचा है। देखना दिलचस्प होगा कि भारत-पाकिस्तान के रिश्ते क्या करवट लेते हैं।

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