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केरल में निपाह वायरस से 10 लोगों की मौत, जानिए क्या है NiV, लक्षण, बचाव और इलाज

By उस्मान | Updated: May 21, 2018 13:21 IST

ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब इस बीमारी से मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है। राज्य में इस वायरस के फैलने के बाद लोगों में दहशत है।

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केरल में निपाह वायरस Nipah virus (Niv) इन्फेक्शन से मरने वालों की संख्या 10 हो गई है और लगभग 12 लोग गंभीर रूप से पीड़ित हैं। नेशनल नेशनल वर्गोलॉजी इंस्टीट्यूट के अनुसार, जमगादड़, सुअर और अन्य जानवरों के माध्यम से फैलने वाले इस खतरनाक वायरस ने कोझिकोडे जिले में कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। इस बीच स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने स्वास्थ्य सचिव के साथ केरल के हालातों का जायजा लिया। केंद्र सरकार ने वायरस के इन्फेक्शन पर काबू पाने के लिए शेषज्ञों की एक टीम को केरल भेजा है। नड्डा ने नेशनल सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल के निदेशक को निर्देश दिया कि वे प्रभावित जिलों का दौरा कर आवश्यक कदम उठायें। ऐसा पहली बार देखने को मिला है, जब इस बीमारी से मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है। राज्य में इस वायरस के फैलने के बाद लोगों में दहशत है।

निपाह वायरस क्या है?

फिजिशियन एंड इंटरवेशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर केके अग्रवाल के अनुसार, निपाह वायरस से होने वाला इन्फेक्शन जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह वायरस जानवरों और इंसानों में गंभीर किस्म की बीमारी पैदा करता है। इस वायरस का प्रारंभिक स्रोत फल चूसने वाले चमगादड़ हैं। इस जानलेवा वायरस का कोई इलाज नहीं है। यह मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए जानलेवा बन सकता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार निपा वायरस का उपहार टेरोपस जीनस नामक एक खास नसल के चमगादड़ से मिला है।

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पहली बार 1998 में आया था सामने

निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया के कैम्पुंग सुंगाई निपाह में सामने आया था। यहां सुअरों के जरिए इंसनों में वायरस फैला था। चूंकि निपाह नाम जगह में इसकी पहचान हुई इसलिए इस वायरस का नाम निपाह वायरस रखा गया। दूसरी बार इस वायरस का संक्रमण 2004 बंग्लादेश में सामने आया था। यहां यह बीमारी चमगादड़ों से संक्रमित खजूर खाने से इंसानों में फैली थी।

ऐसे फैलता है संक्रमण

चूंकि निपाह वायरस संक्रमित चमगादड़ या सुअर से इंसान में फैलती है इसलिए इन जानवरों के सीधे संपर्क में आने से बचें। लोगों की यह भी सलाह है कि वे पेड़ से जमीन पर गिरे फलों का सेवन न करें।

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निपाह वायरस से पीड़ित रोगियों के लक्षण

मनुष्यों में एनआईवी संक्रमण एन्सेफलाइटिस से जुड़ा हुआ है। इसमें दिमागी बुखार, दिमागी सूजन, सिरदर्द, अनिद्रा, बेचैनी, मानसिक भ्रम, कोमा जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। सीडीसी के मुताबिक, निपाह वायरस के रोगी 24-48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है। इससे रोगी की मौत भी होने का खतरा बना रहता है। 

निपाह वायरस का इलाज

डॉक्टर के अनुसार, इस वायरस का अभी तक कोई स्थायी उपचार नहीं खोजा गया है। हालांकि कुछ एलॉपथी दवाईयां है लेकिन उनसे इसका कारगर इलाज संभव नहीं है।

 

बचाव ही है इलाज

यह एक संक्रामक बीमारी है जो एक से दूसरे तक फैलती है। ऐसे में सलाह दी जाती है कि प्रभावित इंसान, जानवर या चमगादड़ के संपर्क में ना आएं। साथ ही गिरे हुए फलों को खाने की भी सलाह नहीं दी जाती है।  

(फोटो- पिक्साबे) 

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