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बिहार में स्वास्थ्य विभाग का मामला, वीआरएस ले चुकीं महिला डॉक्टर को घोषित किया मृत, पैसा हड़पने की कोशिश

By एस पी सिन्हा | Updated: June 6, 2021 20:43 IST

महिला डॉक्टर ने खुद डीएम और सीएस को मैसेज कर जिंदा होने का सबूत पेश किया है. मामला प्रकाश में आने के बाद जिलाधिकारी भी हैरान हो गए हैं.

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ठळक मुद्देजिंदा महिला डॉक्टर को कागज पर मारकर उसका वेतन, बीमा और अन्य राशि हड़पने की कोशिश का पर्दाफाश हुआ है. स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है.

पटनाः बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है.

दरअसल, एक जिंदा महिला डॉक्टर को कागज पर मारकर उसका वेतन, बीमा और अन्य राशि हड़पने की कोशिश का पर्दाफाश हुआ है. महिला डॉक्टर ने खुद डीएम और सीएस को मैसेज कर जिंदा होने का सबूत पेश किया है. मामला प्रकाश में आने के बाद जिलाधिकारी भी हैरान हो गए हैं.

जानकारों के अनुसार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने वाली डॉक्टर अमृता जायसवाल को कागजों में मृत घोषित कर उनके नाम पर वेतन भुगतान से लेकर बीमा की राशि सहित अन्य पैसे हड़पने की कोशिश की गई. इसके बाद उन्होंने डीएम और सिविल सर्जन को फोन और व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर अपने जिंदा होने का सबूत दिया है.

इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है. पूर्वी चंपारण जिले के डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर जांच का आदेश दे दिया है. डॉक्टर अमृता जायसवाल छोड़ादानो प्रखंड स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेला बाजार में पदस्थापित थी.

2013 में उन्होंने वीआरएस ले लिया था. लेकिन सेवांत लाभ नहीं लिया था. सेवांत लाभ की राशि में हेरफेर की सूचना पर डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने जांच टीम का गठन किया है. शुरुआती जांच में पता चला है की डॉ. जायसवाल के सेवांत लाभ की फाइल पर धोखे से सिविल सर्जन के स्टेनो मनोज शाही ने हस्ताक्षर करवा लिए. अब जांच कमेटी डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

बताया जाता है कि डॉ. जायसवाल ने अविभाजित बिहार के स्वास्थ्य विभाग में 13 नवंबर 1990 को योगदान दिया था. उनकी पहली पोस्टिंग हजारीबाग में हुई थी. इसके बाद कई जगहों पर उनकी पोस्टिंग हुई. 2002 को उन्होंने पूर्वी चंपारण के स्वास्थ्य विभाग में अपना योगदान दिया और 2003 में छोड़ादानो प्रखंड के एपीएचसी बेला बाजार में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी के रूप में पदस्थापित हुई थीं.

बेला एपीएचसी में पदस्थापन के दौरान उन्होंने वीआरएस लगाई जिसे सरकार ने मंजूर कर लिया था. लेकिन अब मौके का फायदा उठाते हुए उनका पैसा हड़पने का खेल खेलने की तैयारी की थी. लेकिन डॉ, जायसवाल ने अब मामले का खुलासा कर दिया है.

टॅग्स :क्राइम न्यूज हिंदीबिहारपटनानीतीश कुमार
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