पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य की मोहन यादव सरकार से पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर की तत्काल कटौती करने की मांग की है। कमलनाथ ने कहा कि हाल के दिनों में ईंधन की कीमतों में वृद्धि को अंतरराष्ट्रीय कारणों से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि मध्य प्रदेश में ईंधन महँगा होने का प्रमुख कारण राज्य सरकार का ऊँचा वैट और सेस है।
उनके अनुसार मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 29% वैट के साथ 2.5 रुपए और 1% सेस लगाए जा रहे हैं, जबकि डीजल पर 19% वैट के साथ 1.5 रुपए और 1% सेस लिया जा रहा है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि प्रदेश भर में पेट्रोल की कीमत उत्तर प्रदेश की तुलना में औसतन 13 रुपए और डीजल 4 रुपए प्रति लीटर अधिक बनी हुई है। वर्तमान रेट के अनुसार भोपाल में पेट्रोल 110.75 रुपए और डीजल 95.91 रुपए प्रति लीटर है; इंदौर-जबलपुर के रेट 110.79 तथा 95.98 रुपए के आसपास, ग्वालियर 110.69 तथा 95.86 रुपए और उज्जैन में पेट्रोल 111.27 व डीजल 96.40 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
कमलनाथ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वसूले जा रहे कुल कर एक लीटर पेट्रोल पर 30 रुपए से अधिक और डीजल पर 20 रुपए से अधिक हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों से असम्बद्ध हैं। उन्होंने आगाह किया कि ऊँचे करों के कारण सीमावर्ती जिले और व्यवसायिक वाहनों के ड्राइवर दूसरे राज्यों से ईंधन भरवाने लगे हैं, जिससे मध्य प्रदेश को सीधा राजस्व हानि हो रही है और स्थानीय पेट्रोल पंप व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं।
पूर्व सीएम ने तर्क दिया कि करों में कटौती मात्र जनता को राहत नहीं देगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट लागत घटने से व्यापार और जीवनयापन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और राज्य अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से कहा कि सार्वजनिक हित और आर्थिक संवेदनशीलता के आधार पर तत्काल 10 रुपए प्रति लीटर कटौती लागू की जाए और ईंधन पर लगने वाले वैट-सेस के पुनर्मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी समीक्षा पैनल गठित किया जाए।