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Indian Economy: वर्ष 2047 तक नौकरी में400000000 महिलाओं की जरूरत, अर्थव्यवस्था 14000 अरब अमेरिकी डॉलर का होगा!, रिपोर्ट में खुलासा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 25, 2024 06:11 IST

Indian Economy: ‘द नज इंस्टीट्यूट’ ने ‘श्रम बल भागीदारी रिपोर्ट’ जारी की है, जिसमें भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य की रूपरेखा दी गई है।

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ठळक मुद्देपिछले कुछ वर्षों में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) पर आधारित है। देश का लक्ष्य 2047 तक 30 हजार अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।महिला श्रम बल भागीदारी में पर्याप्त वृद्धि की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

Indian Economy: भारत को अर्थव्यवस्था में 14 हजार अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देने के लिए कार्यबल में अतिरिक्त 40 करोड़ महिलाओं की भागीदारी की आवश्यकता है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2047 तक वर्तमान महिला श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) को 37 प्रतिशत से लगभग दोगुना करके 70 प्रतिशत करने की जरूरत होगी। एक नयी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। गैर-लाभकारी संस्था ‘द नज इंस्टीट्यूट’ ने ‘श्रम बल भागीदारी रिपोर्ट’ जारी की है, जिसमें भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य की रूपरेखा दी गई है।

यह रिपोर्ट पिछले कुछ वर्षों में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) पर आधारित है। चूंकि देश का लक्ष्य 2047 तक 30 हजार अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, इसलिए रिपोर्ट में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिला श्रम बल भागीदारी में पर्याप्त वृद्धि की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अर्थव्यवस्था में 14 हजार अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देने के लिए कार्यबल में अतिरिक्त 40 करोड़ महिलाओं की आवश्यकता है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2047 तक वर्तमान महिला श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) को 37 प्रतिशत से लगभग दोगुना बढ़ाकर 70 प्रतिशत करना आवश्यक होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय तक केवल 11 करोड़ महिलाओं के श्रम बल में शामिल होने का अनुमान है, ऐसे में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारी संख्या में महिला कार्यबल को शामिल करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में पुरुषों और महिलाओं के बीच नौकरी की सुरक्षा और दोबारा नौकरी पाने में भारी असमानता का खुलासा किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं के नौकरी खोने की संभावना सात गुना अधिक और छूटने के बाद दोबारा नौकरी मिलने की संभावना 11 गुना अधिक पाई गई। इसमें कहा गया है कि 2020 तक, 2019 में कार्यरत लगभग आधी महिलाएं कार्यबल से बाहर हो चुकी थीं।

महिलाएं मुख्य रूप से कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों जैसे कि कृषि और विनिर्माण में काम करती हैं, जहां उन्हें पेशेवर प्रगति की कम संभावना का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण क्षेत्र में महिलाएं कार्यबल का सिर्फ 12 प्रतिशत हिस्सा हैं, जिन्हें अक्सर अकुशल भूमिकाओं में पुरुषों की तुलना में काफी कम भुगतान किया जाता है। ‘द नज इंस्टीट्यूट’ के निदेशक कनिष्क चटर्जी ने कहा, ‘‘भारत के 30 हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के सपने को कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिए बिना साकार नहीं किया जा सकता है।’’

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